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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 38.pdf/२२६

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सम्पूर्ण गांधी वाङ्मय

शारदाबहन यदि शुद्ध भावसे सर्वार्पिण कर सके तो उससे जो गलतियाँ हुई हैं, उन्हें मैं ईश्वरकी कृपाका प्रसाद ही समझँगा। उसमें शक्ति तो है। मैं उसके पत्रकी राह देख रहा हूँ।

राधा यदि काम करनेके लिए तैयार हो और यदि [उसका] परिवार रहना चाहता हो तो उसके लिए वेतन निश्चित कर देना। मेरे सख्त पत्रके बाद वह वहाँ रहेगी कि नहीं, कहा नहीं जा सकता। राधाका पत्र आज आना चाहिए था।

बापूके आशीर्वाद

कुसुमबनके बारेमें तो मैं तुम्हें लिख चुका हूँ। यदि तुम्हें ऐसा लगे कि उसे वहाँ रोक रखनेसे उसका शरीर कमजोर ही होता जायेगा और यदि वह यहाँ आना चाहती हो तो उसे भेज देना।

बापू

[ गुजराती से ]
बापुना पत्रो : श्री छगनलाल जोशीने
 

२२३. पत्र : कुसुम देसाईको

वर्धा
शनिवार, ८ दिसम्बर, १९२८

चि॰ कुसुम,

तू स्वस्थ नहीं हो रही है, यह क्या बात है? मेरे पास आनेकी इच्छा हो और उससे तेरे स्वास्थ्यके सुधरनेकी आशा हो तो आ जाना। भाई छगनलालको इस विषयमें लिखा है।[] किन्तु प्रभावती के बारेमें सोचना। फिर भी इस समय शरीरको सँभालना तेरा पहला कर्त्तव्य है।

बापूके आशीर्वाद

गुजराती (जी॰ एन॰ १७६४) की फोटो-नकलसे।

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