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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 38.pdf/२२९

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रक्त-रंजित मार्ग

पिता मुझे जनाना और हिजड़ा कहकर झिड़कने लगे। लड़कीके पिताने पैसेवाला घर देखकर मुझ छोटी उम्रवालेके साथ अपनी लड़की ब्याह दी, यह उनकी कितनी बड़ी भूल है? मेरे पिताने मुझे बचपन से गढ़में डाल दिया और यह बेजोड़ शादी कर दी। इसकी अपेक्षा तो मेरा विवाह ही न करते तो अच्छा रहता। जब मेरा विवाह हुआ, उस समय इतनी बुद्धि होती तो में विवाह करता ही नहीं। लेकिन लाचारी है। अब मुझे क्या करना चाहिए? जवाब 'नवजीवन' में दीजियेगा।

इस पत्र में ठिकाना-पता है, लेकिन इस डरसे कि घरके लोग पत्र न पहुँचने देंगे, लेखकने 'नवजीवन' द्वारा जवाब माँगा है। यह स्थिति 'दयाजनक' है। यदि इस नवयुवकमें हिम्मत हो तो उसे यह विवाह अवश्य नामंजूर कर देना चाहिए। सच पूछिए तो यह विवाह विवाह ही नहीं है। सप्तपदीमें दोनोंने क्या-क्या प्रतिज्ञाएँ कीं, उनका भी इस युवकको और लड़कीको भान नहीं हो सकता। दोनों साथ-साथ तो रहे ही नहीं हैं। विवाह नामंजूर करनेसे घरबार छोड़ना पड़े तो छोड़ देना चाहिए। पिता और श्वसुरकी नजरोंमें यह लेख आये तो उनसे मैं प्रार्थना करूँगा कि वे इस निर्दोष बालक और बालाको गढ़में न गिरायें, पापसे बच जायें। १५ वर्षका युवक पढ़ने और उद्योग करने लायक है, घर संसार चलाने योग्य बिल्कुल नहीं है। माँ-बापका फर्ज है कि वे अपना धर्म समझें, यदि न समझें तो लड़कों और लड़कियोंको नम्रतापूर्वक विरोध करके धर्मका पालन करना चाहिए।

[गुजराती से]
नवजीवन, ९-१२-१९२८
 

२२६. रक्त-रंजित मार्ग

लालाजी और उनके साथियोंको अकारण मारा-पीटा गया। इससे भी सरकार और आयोगको शान्ति नहीं मिली लगती। ऐसा प्रतीत होता है कि स्थानीय सरकारने पंजाबकी पुलिसको निर्दोष मानकर उसे प्रमाणपत्र दे दिया है। इससे लखनऊकी पुलिसको प्रोत्साहन मिला है, क्योंकि यदि लाहौरकी पुलिसके लिए लालाजी और उनके साथियोंपर आक्रमण करनेका कोई कारण न था तो लखनऊकी पुलिसके लिए पं॰ जवाहरलाल नेहरू और उनके साथियोंपर आक्रमण करनेका तो उससे भी कम कारण था। और जहाँ लाहौरकी पुलिसने सिर्फ लाठियोंका प्रयोग किया, हम देखते हैं कि वहां लखनऊकी पुलिसने निर्दोष और निहत्थे लोगोंपर अपने डंडोंके अलावा संगीनोंका भी प्रयोग किया। पं॰ जवाहरलाल नेहरूके एक बयानसे तो जान पड़ता है कि उसने लोगोंपर पत्थरोंकी वर्षा करके भी अपनी बहादुरी दिखाई और फलस्वरूप दो व्यक्ति मरणासन्न हैं।

इस प्रकार आयोगका मार्ग निर्दोष मनुष्योंके रक्तसे सिंचित है। राजकीय आयोगके सदस्योंको चारों ओर की जानेवाली हड़तालों और काले झंडे लिए हुए लोगों के