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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 38.pdf/२३६

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२३२. पत्र : शान्तिकुमार मोरारजीको

आश्रम, वर्धा
९ दिसम्बर, १९२८

चि॰ शान्तिकुमार,

तुम्हारा पत्र मिल गया है। तुम्हारा भेजा हुआ चैक लालाजीके कोष में जमा कर दिया है।

मुझे पारसी बहन या उस आयरिश महिलाको आश्रम भेजने की जरूरत दिखाई नहीं देती। यदि उन्हें मालूम हो कि बिस्कुट किस तरह बनाये जाते हैं तो वह तरीका लिखकर भेज दें, बस इतना ही काफी होगा। बिस्कुटमें घी, तेल कुछ न डालें तो भी वे हलके बनने चाहिए।

जहरीले साँपोंकी पहचान के बारेमें एक पुस्तिकाकी समीक्षा मैंने ६ या ७ (दिसम्बर) के आसपास 'टाइम्स' में देखी थी। लेखकका नाम मैं भूल गया हूँ। यह समीक्षा 'करंट टापिक्स' में थी। यदि यह पुस्तिका मिल सके तो भेजना।

शंकरलालने लिखा है कि सुमन्तके विषय में समाचारपत्रोंमें कुछ लिखने की जरूरत नहीं है। उसे निकाल तो दिया है।

बापूके आशीर्वाद

[पुनश्च :]

किताबका नाम मिल गया है:

'पोयजनस टेरस्टियल स्नेक्स ऑफ ब्रिटिश इंडिया ऐंड हाउ टु रेक्गनाइज दैम' (ब्रिटिश भारतके विषैले साँप और उनकी पहचान); लेखक : कर्नल वॉल, प्रकाशक : बाम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी।

गुजराती (सी॰ डब्ल्यू॰ ४७९० अ) की फोटो-नकलसे।
सौजन्य : शान्तिकुमार मोरारजी