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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 38.pdf/२६१

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२६१. पत्र : सतीशचन्द्र दासगुप्तको

वर्धा
१३ दिसम्बर, १९२८

प्रिय सतीश बाबू,

आपका पत्र मिला। 'पूलिंग'[] (एकत्रीकरण) से सम्बन्धित आपके सुझाव मैं घनश्यामदासजीको भेज रहा हूँ।

मुझे प्रसन्नता हुई कि महावीरप्रसादजीसे आप सम्पर्क स्थापित कर चुके हैं। यदि पहले आपका उनके साथ परिचय न हो तो मैं चाहूँगा कि आप उनके साथ काफी निकटता पैदा कर लें। वह बड़े ही बढ़िया आदमी हैं और यदि हमारे सब नहीं तो अधिकांश आदर्शो में विश्वास रखते ही हैं।

कृष्णदास अब यहीं है, और वह आपके तथा हेमप्रभादेवी और आम तौर पर सोदपुरके बारेमें जो अनेक बातें बतलाता है, मैं उनका रसास्वादन करता रहता हूँ। बस चिन्ता यही है कि आप और हेमप्रभादेवी कहीं कार्याधिक्यके कारण खाट न पकड़ लें। 'गीता' की भावनासे प्रेरित होकर काम करनेवाले लोग कभी भी शक्तिसे अधिक काम करके अपने आपको थकाते नहीं हैं, क्योंकि वे सर्वथा निरपेक्ष रहकर काम करते हैं और पूर्णतः निरपेक्ष रहनेका मतलब हैं चिन्तासे पूरी तरह छुटकारा। हम जब अपने-आपको ईश्वरके हाथका एक साधन मानकर काम करते हैं और स्वयंको पूरी तरह उसीके हाथों समर्पित कर देते हैं, तब फिर फल जो भी निकले चिन्ता किस बातकी, विक्षुब्ध होनेका तब कोई कारण नहीं रह जाता, भले ही क्षितिज पर कुछ समय के लिए बादलोंकी कालिमा गनसे-गनतर हो उठे। ईसाने यही सीख

  1. दिनांक १० दिसम्बर, १९२८ के अपने पत्र में उन्होंने लिखा था : "यदि किसी प्रान्तके खद्दरकी कीमत घटानी हो तो उसका तरीका यह है कि स्थानीय खादीके साथ अन्य प्रान्तोंकी अपेक्षाकृत कम मूल्यकी खादी मिला दी जाये, दोनोंको एकत्र कर दिया जाये। पर इस तरह कई प्रान्तोंकी खादी एकत्र या 'पूल' करनेवालेको इस बातकी गारंटी देनी होगी कि जिस प्रान्तमें वह खादी एकत्र करेगा, 'पूल' में शामिल करेगा, उस प्रान्तमें तैयार होनेवाली सारी खादीकी बिक्रीकी जिम्मेदारी उसीपर होगी।...'पूल' करनेवाला प्रान्त इस स्थितिमें अपने स्थानीय बाजारमें कमसे कम उतार-चढ़ाव लाये बिना यथासम्भव अधिक से अधिक खादीकी बिक्री करना चाहता है। ऐसी स्थितिमें 'पूलिंग' का तरीका यह है कि खादीकी स्थानीय कीमतोंको मानक मान कर स्थिर रखा जाये और अन्य प्रान्तोंसे अपेक्षाकृत महंगी और अपेक्षाकृत सस्ती दोनों ही प्रकारकी खादी थोड़ी-थोड़ी मात्रा में खरीद कर उनको स्थानीय खादी के साथ ही स्थानीय मानक कीमत पर बेचा जाये।... 'पूलिंग' हानिकारक तो तब होगी जब खादीका उत्पादन करनेवाले प्रान्तमें उसके समूचे उत्पादनकी बिक्रीकी कोई जिम्मेदारी लिये बिना ही अन्य प्रान्तोंकी खादीको एकत्र कर दिया जाये। उदाहरणके तौरपर श्री जेराजाणी सारे भारतवर्षकी बढ़ियासे-बढ़िया खादी खरीद कर उनकी कीमत सामूहिक रूपसे तय करके एक निश्चित कीमतपर बम्बई में उसकी बिक्री कर सकते हैं। बम्बईको इससे कोई हानि नहीं होगी, क्योंकि वहाँ स्थानीय तौरपर खादीका उत्पादन नहीं होता।"