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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 38.pdf/२६५

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२६५. पत्र : रमाबहन जोशीको

गुरुवार [१३ दिसम्बर, १९२८][]

चि॰ रमाबहन,

तुम खासी बीमारी लेकर मन्दिरमें वापस आई हो। यह पत्र मिलने तक बच्चे तो अच्छे हो ही गये होंगे। किन्तु यदि तुम उनका ठीक-ठीक लालन-पालन न कर सको तो यह तुम्हारे लिए लज्जाकी बात होगी और मन्दिरके लिए भी। तुम्हें चाहिए कि तुम बच्चोंको वे जो माँगें वह नहीं बल्कि उनके लिए जो हितकर हो वही दो। देनेसे इनकार करनेमें सख्ती करनेकी जरूरत नहीं है। उन्हें समझाया जा सकता है। यह बात तो मैंने तुम्हें कई बार बताई है।

बापूके आशीर्वाद

[गुजरातीसे]
बापुना पत्रो : श्री छगनलाल जोशीने
 

२६६. पत्र : घनश्यामदास बिड़लाको

गुरुवार [१३ दिसम्बर, १९२८][]

भाई घनश्यामदासजी,

लालाजीके बारेमें खत मीला है। खादीका काम चल रहा है जानकर मुझको आनंद होता है। इस बारेमें सतीशबाबूका खत आया है। आपको पढ़नेके लीये भेजता हुँ। वापिस भेजनेकी आवश्यकता नहि है।

आपका,
मोहनदास

सी॰ डब्ल्यू॰ ६१६४ से।
सौजन्य : घनश्यामदास बिड़ला
 
  1. रमाबहन और बच्चोंकी बीमारीके उल्लेखसे; देखिए पिछला शीर्षक भी।
  2. देखिए "पत्र : सतीशचन्द्र दासगुप्तको", १३-१२-१९२८।