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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 38.pdf/२६७

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पत्र : डॉ॰ वि॰ च॰ रायको

तो बताये। मैं चाहता तो अवश्य हुं की सोदपुरमें भी हम वहीं प्रयोग करे जो साबरमती में हो रहे हैं परंतु यह सब बात ईश्वराधीन है। सोदपुरमें जो कुछ भी हो आपको तो मैं आश्रमवासी ही समझता हूँ।

बापूके आशीर्वाद

जी॰ एन॰ १६४६ की फोटो नकलसे।

 

२६९. पत्र : डॉ॰ वि॰ च॰ रायको

वर्धा
१४ दिसम्बर, १९२८

प्रिय डॉ॰ विधान,

कश्मीर स्थित अखिल भारतीय चरखा संघके प्रतिनिधिका तार नत्थी है। मैं व्यक्तिगत अनुभवसे जानता हूँ कि कश्मीरमें तैयार-शुदा बहुत-सा माल हाथकते और हाथबुने मालके नामपर ठेल दिया जाता है, लेकिन असल में उसका सूत विदेशी ही होता है। कश्मीरमें मिलका कता स्वदेशी सूत मिलनेका सवाल ही नहीं उठता। वह या तो विदेशी हो सकता है या फिर हाथका कता हुआ सूत। विदेशी सूत बड़ी तेजीसे हाथ-कते सूतकी जगह लेता जा रहा था। अखिल भारतीय चरखा संघका प्रतिनिधि वहाँ इसी गड़बड़ीको रोकने गया था। अब देखना यह है कि गड़बड़ी किस हदतक रोकी जा सकती है। जो भी हो, उसको वहाँ तैनात करनेसे कई जालसाजियोंका पर्दाफाश हुआ है।

क्या मैं उम्मीद करूँ कि अखिल भारतीय चरखा संघ द्वारा अप्रमाणित कोई भी वस्तु प्रदर्शनी में नहीं रखी जायेगी।

हृदयसे आपका,

सहपत्र – १
डॉ॰ विधानचन्द्र राय
३६, वेलिंग्टन स्ट्रीट
कलकत्ता

अंग्रेजी (एस॰ एन॰ १३३०१ ) की माइक्रोफिल्म से।