२७२. पत्र : हरिकृष्णदासको
स्थायी पता
साबरमती आश्रम
१४ दिसम्बर, १९२८
आपका पत्र मिला। मैं आपको कोई सलाह तभी दे सकता हूँ जब अंग्रेजोंकी ओरसे दिये गये उस निश्चित वचनका[१] पूरा पाठ मेरे सामने हो, जो आप कहते हैं कि आपके नगरकी स्थापनाके समय उनकी ओरसे दिया गया था। हाँ, लेकिन सत्याग्रहका मार्ग अपनाना यदि कभी उचित जान पड़े तो भी उसे तभी अपनाना चाहिए जब आप अन्य सभी वैधानिक उपायोंको आजमा कर देख चुके हों और यदि आपका पक्ष बहुत ही सबल हो तो आपको भले मुसलमानोंसे भी बात करके उनसे हस्तक्षेप करनेके लिए अनुरोध करना चाहिए। ऐसे मुसलमानोंमें एक डॉ° अन्सारी भी हैं।
हृदयसे आपका,
सम्पादक 'बिजली'
फाजिल्का
अंग्रेजी (एस° एन° १३८००) की फोटो-नकलसे।
२७३. पत्र : डॉ° सच्चिदानन्द सिन्हाको
स्थायी पता
साबरमती आश्रम
१४ दिसम्बर, १९२८
पत्रके लिए धन्यवाद। आपके लेख अभी भी मेरी फाइलमें हैं। यह तो मुझे भी लगा था कि मन्त्रीने गया जिला बोर्डको निष्प्रभावी बना कर एक असाधारण कदम उठाया है। मुझे किसी भी दृष्टिसे उसका किंचित भी औचित्य समझ में नहीं आया। मैं आशा करता हूँ कि शक्तिके ऐसे घोर दुरुपयोगका कोई कारगर इलाज आप बिहारके लोग अवश्य निकालेंगे।
हृदयसे आपका,
पटना
अंग्रेजी (एस° एन° १३८०२) की माइक्रोफिल्म से।
- ↑ शहर में गोवध न होने देनेके बारेमें।