२८८. खादी सुधार सम्बन्धी सुझाव
मोम्बासासे एक खादी-प्रेमी भाईने श्री विठ्ठलदास जेराजाणीको निम्न पत्र लिखा है जो उन्होंने मेरे पास भेज दिया है :[१]
इसका मतलब यह हुआ कि मिलके कपड़ोंकी किस्मोंको जाननेवाले खादीमें दिलचस्पी लें और अलग-अलग बटका सूत तैयार करायें। यह काम हो सकता है और कुछ अंशोंमें होता भी है, लेकिन बहुत ही थोड़ा। मिलोंकी जानकारी रखनेवालोंमें से बहुत थोड़े लोगोंने अबतक खादी-प्रचारमें दिलचस्पी ली है और खादीका प्रचार करनेवालोंने खादीकी दृष्टिसे मिलके कपड़ोंका और उनकी बनावटका अध्ययन नहीं किया है। अज्ञानवश बहुतोंने यह मान लिया है कि मिलके उद्योगमें तो कुछ भी सीखने योग्य नहीं है, और कुछ लोगोंकी तो यह मान्यता रही है कि खादी चाहे जैसी हो, कोई बात नहीं। इसके बावजूद सन १९१८ में खादी-प्रचारकी दृष्टिसे सत्याग्रह आश्रममें जब पहली बार खादीका पहला धोतीका थान तैयार किया गया तो उसकी कीमत १७ आने गज रखी गई थी, क्योंकि उसपर उतना ही खर्च पड़ा था। पर उस खादीके साथ आजकी खादीकी तुलना करनेपर उसकी किस्म और भाव दोनोंमें जमीन-आसमान का फर्क दिखाई देता है। इससे इतना तो कहा ही जा सकता है कि अनेक खादी-प्रचारकोंने खादीके सुधारकी बातको भी ध्यानमें रखा है। इस बातका नियमित अध्ययन स्वयं मगनलालने शुरू किया था और उसका परिणाम भी अच्छा निकला था। उक्त अध्ययन अब भी चालू है, लेकिन उसमें सुधार करनेकी आवश्यकता है, यह मुझे मान लेना चाहिए। जैसा कि इस पत्र लेखकने लिखा है, मिलका काम जाननेवाले यदि थोड़ा-बहुत समय खादी सुधारके अध्ययनमें दें तो बहुत अधिक सुधार हो सकता है, इसमें कोई शंका नहीं। खादीके अधिकाधिक प्रचारके लिए खादीकी सामर्थ्यके अनुसार उसके रंग-रूप में विविधता लानी ही होगी। हालाँकि अन्तमें एक ऐसा स्थान होगा, जहाँ जाकर दोनों-खादी और मिलके कपड़ोंकी मर्यादा निश्चित हो जायेगी—और जहाँ एक-दूसरेका अनुकरण नहीं हो सकेगा। इतना ही नहीं बल्कि अनुकरणकी आवश्यकता ही न रहेगी। जैसे कि खादीकी कुछ कलाओं तक मिलें आजतक भी नहीं पहुँच सकी हैं और न कभी पहुँच ही सकती हैं, इसी तरह मिलें करोड़ों रुपयोंका महीन, सस्ता और ऊपरसे सुन्दर दीखनेवाला कपड़ा बना सकती हैं पर उतनी मात्रामें उस तरह की खादी नहीं बनाई जा सकती है, और न बनानेकी आवश्यकता ही रहेगी। माँग हो या न हो, मिलोंका कपड़ा तो सिर्फ लोगोंको पहनाने और ज्यादा नफा कमानेकी दृष्टिसे बनाया जाता है। किन्तु खादी तो आवश्यकताकी पूर्ति हो सके, इतनी मात्रामें ही बनाई जा सकती है। सिर्फ पहनानेकी गरज से ढेरों
- ↑ पत्रका अनुवाद यहाँ नहीं दिया गया है। पत्र लेखकने सुझाव दिया था कि अच्छे किस्मकी खादी तैयार करनेके लिए हमें सूती कपड़ा तैयार करनेवाले विशेषज्ञोंकी सहायता लेनी चाहिए।