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२९२. पत्र : शान्तिकुमार मोरारजीको
रविवार [१६ दिसम्बर, १९२८][१]
चि° शान्तिकुमार,
तुम्हारा पत्र मिला। साँपोंकी किताब मिल गई है। एक और जरूरी हुई तो मँगा लूँगा। माँजीके साथ क्या दुर्घटना हुई और कैसे? उनसे कहना, अभी तो उन्हें बहुत वर्ष जीना है।
बापूके आशीर्वाद
[पुनश्च :]
गोकी बहन से कहना कि उसका पत्र मुझे मिल गया है।
श्री शान्तिकुमार
शान्ति भवन
पेडर रोड
बम्बई
शान्ति भवन
पेडर रोड
बम्बई
गुजराती (सी° डब्ल्यू° ४७१०) की फोटो-नकल से।
सौजन्य : शान्तिकुमार मोरारजी
२९३. पत्र : प्रभावतीको
१६ दिसम्बर, १९२८
चि° प्रभावती,
तुमारा खत मीला है। मैं सोच रहा हूं। कुछ गभरानेकी बात नहिं है। ज्यादा लीखनेका समय नहि है।
बापूके आशीर्वाद
जी° एन° ३३४४ की फोटो नकलसे।
- ↑ देखिए "पत्र : शान्तिकुमार मोरारजीको", ९-१२-१९२८।