ईश्वर आपको दीर्घायु बनाये। आप अब एक बड़ी उथल-पुथल में पड़ने जा रहे हैं। पर आप खुद भी तो यही चाहते थे। लीजिए, वह आपको ब्याज समेत मिल जायेगी।
आपका,
मो° क° गांधी
अंग्रेजी (जी° एन° ८८१६) की फोटो नकलसे।
२९६. पत्र : महादेव देसाईको
वर्धागंज
मौनवार, १७ दिसम्बर, १९२८
आज मौनवार है, इसलिए यह पत्र तो याद दिलानेके लिए ही है। अब तो हम तीन व्यक्ति 'यंग इंडिया' और 'नवजीवन' में जुट गये हैं, इसलिए कोई अड़चन नहीं होनी चाहिए। यहाँ अन्य तो बहुत कुछ पड़ा है।
रानी आज शामको आ रही है। कु° रायडन भी आ रही है। सुब्बैयाको उस तारके बारेमें याद नहीं है।
बापूके आशीर्वाद
गुजराती (एस° एन° ११४३८) की फोटो-नकलसे।
२९७. पत्र : कुसुम देसाईको
वर्धा
मौनवार, १७ दिसम्बर, १९२८
तुम्हारे दोनों पत्र मिल गये हैं। तुम्हें माफ तो कर दिया था। जिसे मैं मूर्ख मानता हूँ, माफ करते हुए भी उसे उसकी मूर्खता तो बतानी ही चाहिए। भाषा आनेसे ऐसा हुआ कहकर अपना बचाव कर लेनेका नाम मूर्खता नहीं है; लोग उसे धूर्तता अथवा चालाकी कहते हैं।
फिरसे बुखार होनेकी खबर आज मिली है। हिम्मतसे ज्यादा काम करनेमें अहंकार तो होता ही है; पर ऐसा करना स्पष्टतः मूर्खता भी है। जिसका शरीर लोह खण्ड जैसा हो वह भले शक्तिसे ज्यादा काम करे। उसके लिए तो कोई काम ही नहीं है जो शक्तिके बाहर हो या जो केवल शून्य बनकर ईश्वरमें श्रद्धा रखे वे ही ऐसे काम कर सकते हैं। जब तुम्हारे मनमें ऐसी श्रद्धा आ जाये और तुम शून्य