यह पृष्ठ जाँच लिया गया है।
२६७
हिन्दी अध्यापक चाहिए
- ३. अगर औरोंको भी दाखिला मिलता है तो वे अपने रहने, खाने, वगैरहका इन्तजाम कैसे करते हैं?
- ४. इन्तजामिया बोर्डमें कितने और कौन-कौन मेम्बरान है? क्या उसमें कोई गैर-मुसलमान भी है?
- ५. उसके लिए जमा किया गया चन्दा संस्थाको दे दिया जाता है या अभी आपके ही पास है?
- ६. अगर आपके ही पास है तो आप कब और कैसे उसका इस्तेमाल करनेकी सोच रहे हैं?
जवाब ये हैं :
जामियाको उदारसे उदार दृष्टिकोण और सिद्धान्तोंके आधारपर चलाया जा रहा है। पत्र लेखकको उसकी नियमावलिकी एक प्रति मँगवाकर पढ़नी चाहिए जो दिल्ली में उसके अधिकारियोंको लिखनेसे मिल जायेगी।
वैसे तो व्यवहारतः यह संस्था केवल मुसलमानोंके लिए है और स्वाभाविक भी यही है, पर प्रत्येक जाति और धर्मवालोंको इसमें खुले तौरपर दाखिला दिया जाता है।
मैं समझता हूँ कि गैर-मुसलमान विद्यार्थियोंको अपने खानेका प्रबन्ध स्वयं करना पड़ता है।
सेठ जमनालालजी भी एक 'ट्रस्टी' हैं। 'ट्रस्ट' के अन्य सभी सदस्य मुसलमान हैं।
कोषकी सारी राशि कोषाध्यक्ष सेठ जमनालाल बजाजके पास रहती है।
[अंग्रेजीसे]
यंग इंडिया, २०-१२-१९२८
यंग इंडिया, २०-१२-१९२८
३१७. हिन्दी अध्यापक चाहिए[१]
'
- दक्षिण भारत हिन्दी प्रचार सभाने ऐसे सुशिक्षित नवयुवकोंसे प्रार्थनापत्र माँगे हैं जिनकी मातृभाषा हिन्दी हो और जो दक्षिण भारतमें कमसे कम दो वर्षतक हिन्दी अध्यापकोंके रूपमें काम करनेको तैयार हों। इस सम्बन्धमें मन्त्री, हिन्दी प्रचार सभा, हाई रोड, ट्रिप्लिकेन, मद्राससे लिखा-पढ़ी की जा सकती है।
डब्ल्यू° पी° इग्नेटियस
मैं आशा करता हूँ कि इस अपीलपर उत्तर भारतके नवयुवक एक पर्याप्त संख्या में आयेंगे।
[अंग्रेजीसे]
यंग इंडिया, २०-१२-१९२८
यंग इंडिया, २०-१२-१९२८
- ↑ यहाँ कुछ अंश ही दिये जा रहे हैं।