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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 38.pdf/३३६

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सम्पूर्ण गांधी वाङ्मय


शायद इतना सब कहकर भी मैं जो कुछ कहना चाहता हूँ वह पूरी तरह स्पष्ट नहीं हुआ। पर मुझे इसमें सन्देह नहीं है कि तुम उसे समझ गये हो।

बा, महादेव, सुब्बैया, प्यारेलाल, कृष्णदास, छगनलाल, जमनादास, केशु, जमनालाल और राजगोपालाचारी तथा कई अन्य लोग, जिनसे आपका घनिष्ठ परिचय है, मेरे साथ हैं।

श्री सी॰ एफ॰ एन्ड्रयूज
११२, गोवर स्ट्रीट
लन्दन डब्ल्यू॰ सी॰ १

अंग्रेजी (एस॰ एन॰ १५१२८) की फोटो-नकलसे।

 

३५१. पत्र : प्रभावतीको

शुक्रवार [२८ दिसम्बर, १९२८ या उसके पूर्व][]

चि॰ प्रभावती,

तुमारे खत ठीक आते रहते हैं। मुंबईसे तो बहोत मित्र लोग आते जाते रहते हैं। उनके साथ तुमको भेज देंगे। मृत्युंजयको मैं लीखुंगा ।

मेरा तेल खानेका प्रयोग मैं सावधानीसे कर रहा हूं। कुछ भी नुकशान पहोंचेगा तो छोड़ दूंगा।

आज बा कुछ बिमार हो गई है।

बापुके आशीर्वाद

जी॰ एन॰ ३३१७ की फोटो नकलसे।

 
  1. देखिए "पत्र : छगनलाल जोशीको", १०-१२-१९२८ तथा "पत्र : कुसुम देसाईको", ३०-१२-१९२८। इनमें से पहले पत्रमें गांधीजी द्वारा तेलके प्रयोग तथा दूसरेमें प्रभावतीके आश्रमसे अनुपस्थित रहनेका उल्लेख है।