- यदि राजनीतिक परिस्थितिकी अनिवार्यता ही बाधक न हुई, और यदि ब्रिटिश पार्लियामेंटने इसे पूर्ण रूपमें ३१ दिसम्बर १९२९ तक या उससे पहले स्वीकार कर लिया, तो यह सभा इस संविधानको अंगीकार कर लेगी। परन्तु यदि यह उस तारीखतक स्वीकार नहीं किया गया या उससे पहले अस्वीकार कर दिया गया तो कांग्रेस देशको कर न देनेकी सलाह देकर तथा अन्य निश्चित किये गये उपाय अपनाकर एक अहिंसात्मक असहयोग आन्दोलन संगठित करेगी।
- जो कुछ ऊपर कहा गया है उसके अनुरूप, यह प्रस्ताव कांग्रेसके नाम पर चलनेवाले पूर्ण स्वाधीनताके प्रचारमें किसी भी तरह बाधक नहीं होगा।
- मूल प्रस्तावके स्थानपर नया प्रस्ताव पेश करते हुए महात्मा गांधीने कहा :
मित्रो, मेरा इरादा आपके सामने कोई लम्बा भाषण देनेका नहीं है; पर मैं यह अवश्य स्वीकार करूँगा कि मैं अपने विचारोंको एक सूत्रमें पिरो नहीं पाया हूँ, मेरा दिमाग अस्तव्यस्त है, और मुझे आपके सामने बोलते समय ही अपने विचारोंको तरतीव देनी है। वास्तवमें यह एक तथ्य है कि मेरा दिमाग अस्तव्यस्त है। एक चिकित्सक आपको बता सकता है कि यदि किसी आदमीको सारी रात जागना पड़े तो उसका हाल क्या होगा। मेरे साथ ऐसा ही हुआ, पासके एक छोटेसे तम्बूमें जहाँ सम्मेलनकी कमेटीकी बैठक हो रही थी, मुझे बैठककी गम्भीर कार्यवाहियोंको खूब ध्यानसे समझना पड़ा। मैं उस बैठकमें बुलाया नहीं गया था, बल्कि हमारे अध्यक्ष मुझे वहाँ घसीट कर ले गये थे। मेरा खयाल था कि मुझे उस कमेटीकी बैठकमें शामिल नहीं होना पड़ेगा। पर अनिवार्य आदेश मिला, मुझे एक गाड़ी में बैठना पड़ा, और वह मुझे वहाँ ले गई। सुबहके ढाई बज चुके थे तब मुझे वहाँसे छुट्टी मिली। उसके बाद सोना मेरे लिए सम्भव न था।
इस तरह् अब आप यह समझ सकते हैं कि जो मैं यह कहता हूँ कि मेरा दिमाग अस्तव्यस्त है, उससे मेरा मतलब क्या है।
यह प्रस्ताव, जिसे पेश करनेका मुझे सौभाग्य प्राप्त हुआ है, आप सुन चुके हैं। मैं चाहूँगा कि सबसे पहले आप उस चीजपर ध्यान दें जो मूल प्रस्तावमें थी और इसमें छोड़ दी गई है। ऐसा करना कोई इसलिए जरूरी नहीं है कि मैं आपके आगे इस प्रस्तावकी प्रशंसा करना चाहता हूँ। मैं यह जानता हूँ कि यह प्रस्ताव इस सभा के दो दलों, दो बड़े दलों द्वारा स्वीकार कर लिया गया है, इसलिए इसे किसी प्रशंसाकी आवश्यकता नहीं है। यदि मैं इस प्रस्तावको आपके आगे केवल रख ही दूं तो भी मुझे विश्वास है कि आप इसका पूरी तरह समर्थन करेंगे। थोड़ेसे लोग ऐसे हो सकते हैं जो इसके खिलाफ वोट दें; पर मेरा उद्देश्य इस प्रस्तावको केवल पास करवाना नहीं है। इस बातका महत्त्व सबसे कम है। मेरा उद्देश्य आपका ध्यान इस बातकी ओर खींचना है कि आपसे क्या अपेक्षा की जाती है, आप मूल प्रस्तावकी जगह इस प्रस्तावको क्यों पास कर रहे हैं; और जो दल पहले प्रस्तावको ख़त्म कराने में कारण रहा है, उससे क्या अपेक्षा की जाती है। आप