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३५६. पत्र : वसुमती पण्डितको
कलकत्ता
रविवार, ३० दिसम्बर, १९२८
चि॰ वसुमती,
रोज लिखनेको मन करता है, किन्तु लिख कैसे पाता? तुमने मुझे [अपना] वजन नहीं लिखा। अवश्य बम्बई जाकर सारी बातोंकी जानकारी कर लेना। इस बार उद्योग-मन्दिर जानेपर बिलकुल प्रसन्न चित्त रहना।
बापूके आशीर्वाद
चि॰ वसुमती बहन
सत्याग्रहाश्रम, वर्धा
सत्याग्रहाश्रम, वर्धा
गुजराती (सी॰ डब्ल्यू॰ ५०१) की फोटो-नकलसे।
सौजन्य : वसुमती पण्डित
३५७. पत्र : महादेव तुकाराम वालवलकरको
स्थायी पता
आश्रम
साबरमती
३० दिसम्बर, १९२८
प्रिय मित्र,
आपका पत्र मिला। लालाजीके स्मारकके लिए भेजे गये मनीआर्डरकी प्राप्तिकी सूचना आपको मिल गई होगी।
बन्दरोंके बारेमें आपके द्वारा सुझाये गये समाधान दिलचस्प तो हैं, किन्तु आप देखेंगे कि वे अहिंसात्मक नहीं हैं। मैं जिस चीजको रोकना चाहता हूँ वह बन्दरोंको तिल-तिल करके दी जानेवाली यन्त्रणा है।
हृदयसे आपका,
श्रीयुत महादेव तुकाराम वालवलकर
बेनगुर्ला, खादी कार्यालय
बेनगुर्ला, खादी कार्यालय
अंग्रेजी (एस॰ एन॰ १३८२४) की माइक्रोफिल्म से।
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