३६६. पत्र : छगनलाल जोशीको
मौनवार [३१ दिसम्बर, १९२८][१]
आज अधिक कुछ लिखनेको नहीं है। मुझे आशा है कि मैं यहाँसे गुरुवारको निकलकर रविवारको जो ट्रेन सुबह छः बजे पहुँचती है, उससे अहमदाबाद पहुँच जाऊँगा। मुझे एक घंटे के अन्दर ही कांग्रेसकी बैठक में पहुँच जाना होगा। मैं जब वहाँ आऊँ, तो जिन-जिन बातोंके विषय में लिखता आया हूँ, उनपर सब ध्यान देते पाये जायें तो कितना अच्छा हो!
वल्लभभाई और महादेव तो आज ही बारडोली जा रहे हैं।
बापूके आशीर्वाद
बापुना पत्रो–श्री छगनलाल जोशीने
३६७. भाषण : नेहरू रिपोर्ट सम्बन्धी प्रस्तावपर,
कलकत्ता कांग्रेस में–३२[२]
३१ दिसम्बर, १९२८
कांग्रेसकी सोमवारको बैठकमें महात्मा गांधीने वह प्रस्ताव पेश किया जो आपसी समझौते के आधारपर तैयार किया गया था।[३]
प्रस्ताव पेश करते हुए महात्मा गांधीने हिन्दीमें एक संक्षिप्त भाषण दिया। लाउड स्पीकरोंके खराब हो जानसे उनका भाषण नहीं सुना जा सका और पण्डित जवाहरलाल नेहरूने उनके भाषणका एक-एक वाक्य दोहराया।
महात्माजीने अपने भाषण में कहा कि वे काफी सोच-विचार और पूरी परिस्थितिको सावधानी से जाँच करनेके बाद ही इस प्रस्तावको सभाके सामने रख रहे हैं। सभामें नौजवान दल पूर्ण स्वाधीनताके लिए बेताब था।[४]
- ↑ ३ तारीखको कलकत्तासे रवाना होकर अहमदाबाद जानेके उल्लेखसे। उससे पहलेका मौनवार ३१ दिसम्बरको पड़ता था।
- ↑ यह २-१-१९२९ के आजमें दिये गये विवरणसे मिला लिया गया है। भाषण कांग्रेसके खुले अधिवेशन में दिया गया था।
- ↑ यहाँ उद्धृत नहीं किया गया है। देखिए "भाषण : नेहरू रिपोर्ट सम्बन्धी प्रस्तावपर, कलकत्ता कांग्रेसमें-२" २८-१२-१९२८।
- ↑ इससे आगेका अंश आजसे लिया गया है।