अभी आपसे कह रहा हूँ आप उसके आधारपर उसके आशयको ग्रहण कर सकेंगे । उस धाराकी शब्द-रचना उसी विधिके अनुसार होगी जैसी कि देशबन्धु दासने एक अन्य चीजके लिए सुझाई थी। वह उसके अनुसार कार्यान्वित की जा सकेगी अर्थात् कहा जायेगा कि कांग्रेस प्रत्येक कांग्रेसजनसे यह अपेक्षा रखती है कि वह कांग्रेसके ध्येयको आगे बढ़ाने के लिए, विशेषकर उस कार्यक्रमको आरम्भ करनेके लिए जो पूर्वोक्त प्रस्ताव में निर्धारित किया गया है, प्रति मास अपने सामर्थ्यके अनुसार कांग्रेस- कोष में चन्दा देगा । छपे पत्रकी आखिरी धारामें जो शब्द रचना है उसकी जगह ऐसी शब्द-रचना होगी। मैं आपका और समय लेना नहीं चाहता, पर मैं आपको एक चेतावनी दिये बिना नहीं रह सकता। मैं चाहता हूँ कि आप इस प्रस्तावको गम्भीरता से लें और मैं चाहता हूँ कि आप इस प्रस्तावका पूरी गम्भीरतासे पालन करें । मैं यह नहीं चाहता कि आप अभीसे इस प्रस्तावकी स्वीकृतिमें अपने हाथ उठा लें और उसके बाद पूरे बारह महीने इसे भुलाये रखें और अखिल भारतीय कांग्रेस समिति या कार्यसमिति अथवा अध्यक्षसे यह अपेक्षा रखें कि आपके बदले वे कोई चमत्कार कर दिखायेंगे । अध्यक्ष या अखिल भारतीय कांग्रेस समितिके पास कोई जादूका डंडा नहीं है । जादूका डंडा तो आपका अपना दृढ़ संकल्प ही है । एक यही जादूका डंडा आपको स्वराज्य दिलायेगा और देशको शांति और सुख प्रदान करेगा । इसलिए मेरी यह प्रार्थना है कि जबतक कि यहाँ उपस्थित प्रत्येक व्यक्ति इस कार्यक्रमकी उन सभी बातोंको जो उसपर लागू होती हैं, व्यक्तिगत रूपसे गम्भीरतापूर्वक पालन करनेको तैयार न हो, और जबतक आप कांग्रेसके सन्देशको इन बारह महीनोंमें निरन्तर घर-घर पहुँचानेका संकल्प न कर लें, इस प्रस्तावको इन दो स्वीकृत सुझावों सहित आप तबतक पास न करें। मैं चाहता हूँ कि इस अवधि के बाद मुझे पूर्णतया भिन्न वातावरण दिखे । आज तो हममें से हर एकके चेहरेपर निराशा और अविश्वास दिखाई पड़ता है ।
इन शब्दोंके साथ मैं यह प्रस्ताव आपके आगे रखता हूँ और आपको बहुत ही धैर्यके साथ मेरी बात सुननेके लिए धन्यवाद देता हूँ ।' (देर तक जोरसे तालियाँ)
प्रस्ताव इस प्रकार था :
इस बीच कांग्रेसकी गतिविधियाँ इस प्रकार रहेंगी :
(१) विधान-सभाओंमें और उसके बाहर मादक द्रव्यों और पेयोंके पूर्ण निषेधके लिए हर तरह की कोशिश की जायेगी; जहाँ आवश्यक और सम्भव होगा वहाँ शराब और मादक द्रव्योंकी दुकानोंपर धरना दिया जायेगा ।
(२) विधान सभाओंमें और उसके बाहर विदेशी वस्त्रके बहिष्कारके लिए तुरन्त स्थानीय परिस्थितियोंके अनुरूप तरीके अपनाये जायेंगे और हाथके
१. श्रीनिवास आयंगारने प्रस्तावका अनुमोदन किया। पण्डित जवाहरलाल नेहरूने वह प्रस्ताव पढ़- कर सुनाया जो गांधीजी द्वारा श्री सत्यमूर्ति से सलाह-मशविरा करके ठीक किया गया था और फिरसे हिन्दीमें समझाया। इसके बाद प्रस्तावपर मतदान हुआ और वह पास हो गया। विरोधमें केवल दो मत थे ।