कते और हाथके बुने खद्दरके उत्पादन और उपयोगको समर्थन और प्रोत्साहन दिया जायेगा ।
(३) जहाँ-जहाँ किन्हीं खास शिकायतोंका पता चलेगा और जहाँके लोग इसके लिए तैयार होंगे, उन्हें जैसा कि हालमें बारडोली में किया गया था, अहिंसात्मक कार्रवाईसे दूर करनेकी कोशिश की जायेगी ।
(४) कांग्रेस टिकटपर चुने गये विधान-सभाओंके सदस्य अपना अधिकतर समय कांग्रेस समिति द्वारा समय-समयपर निर्धारित रचनात्मक कार्यमें लगायेंगे ।
(५) नये सदस्य भर्ती करके और अधिक कड़ा अनुशासन लागू करके कांग्रेस संगठनको निर्दोष बनाया जायेगा ।
(६) स्त्रियोंकी अक्षमताओंको दूर करनेके उपाय किये जायेंगे और उन्हें राष्ट्रीय निर्माण में अपनी उचित भूमिका अदा करनेके लिए आमन्त्रित और प्रोत्साहित किया जायेगा ।
(७) देशको सामाजिक कुप्रथाओंसे मुक्त करनेके उपाय किये जायेंगे ।
(८) सभी हिन्दू कांग्रेसजनोंका यह कर्त्तव्य होगा कि वे अस्पृश्यताको मिटाने के लिए अधिक से अधिक कोशिश करेंगे और तथाकथित अस्पृश्योंको अपनी अक्षमताओंको दूर करने और अपनी दशाको सुधारने के प्रयास में यथासम्भव पूरी-पूरी सहायता देंगे ।
(९) स्वयंसेवक भर्ती किये जायेंगे जो शहरी मजदूरोंके बीच काम करेंगे और चरखे व खद्दरके अतिरिक्त ग्राम- पुनर्निर्माणके अन्य कार्योंको सँभालेंगे ।
(१०) राष्ट्र-निर्माणके कार्यको उसके सभी क्षेत्रोंमें, आगे बढ़ाने के लिए उपयुक्त अन्य ऐसे कार्य भी किये जायेंगे जो राष्ट्रीय प्रयास में विभिन्न धन्धों में लगे सभी लोगोंका सहयोग प्राप्त करने के लिए उपयुक्त होंगे ।
पूर्वोक्त कार्यक्रम में उल्लिखित कार्योंके लिए धन जुटानेकी दृष्टिसे कांग्रेस हर कांग्रेस जनसे अपने सामर्थ्य के अनुसार, अपनी आयका कुछ भाग कांग्रेस- कोषमें देनेकी अपेक्षा रखती है ।
[ अंग्रेजीसे ]
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेसके ४३ वें अधिवेशनकी रिपोर्ट, १९२८