यह है कि उत्पादनमें वृद्धि कैसे की जाये और उसका लोगोंमें न्यायोचित वितरण कैसे हो। मैं मानता हूँ यहाँ लोगोंसे उनका तात्पर्यं करोड़ों क्षुधार्त्त जनोंसे है। इस लक्ष्यको प्राप्त करनेके लिए विद्वान लेखकके निम्न सुझाव हैं:
१. जमीनके छोटे-छोटे अलाभकर टुकड़ोंको नये सिरेसे बड़े-बड़े चकोंमें मिला दिया जाये।
२. रैयतके कर्ज, सम्पत्ति बन्धक तथा सहकारी बैंकोंकी व्यवस्था करके चुका दिये जायें।
३. राजस्व विषयक कानूनमें सुधार किये जायें और भूमि-करको आय-करसे मिलता-जुलता स्वरूप दिया जाये जिससे भूमिसे होनेवाली एक न्यूनतम आयपर कोई कर न लगे।
४. अलाभकर टुकड़ोंकी चकबन्दीसे जो कृषक विस्थापित हो जायें, उन्हें परती जमीनको — जो कुल क्षेत्रका २३ प्रतिशत है — कृषिके लायक बना कर और बड़े-बड़े उद्योगोंका राष्ट्रीयकरण करके और इस प्रकार उनका विकास करके फिरसे रोजगार दिया जाये।
५. छोटी-बड़ी पूँजी एकत्र करनेके लिए देशकी बैंक व्यवस्थाको, आज वह हमारी आवश्यकताओंके जितनी अनुकूल है, उससे अधिक अनुकूल रूप दिया जाये।
६. श्रमकी परिस्थितियोंमें सुधार करके मालिकों और मजदूरोंके झगड़ोंकी सम्भावना दूर की जाये।
७. बाल-विवाह जैसी सामाजिक कुरीतियोंको, जिनसे जनसंख्या में अवांछनीय वृद्धि होती है और कमजोर सन्तान उत्पन्न होती है, दूर किया जाये।
८. शिक्षा-पद्धति में आमूल परिवर्तन किया जाये, जिससे जन-साधारणमें शिक्षाका प्रसार हो सके और वह जनताकी आवश्यकताओंकी पूर्ति करनेमें समर्थ बने।
९. सेनापर होनेवाले व्ययमें कटौती की जाये और सरकारी सेवाओंमें अपने देश के लोगोंकी भरती करके, यहाँसे जो धन विदेशों में चला जा रहा है, उसे रोका जाये।
यह कार्यक्रम तो बड़ा आकर्षक है। लेकिन जब मैं इन लेखोंको दोबारा पढ़ रहा था तो मेरे मनमें यह सवाल बार-बार आता रहा कि आखिर बिल्लीके गलेमें घंटी कौन बाँधेगा? उनका एक भी सुझाव ऐसा नहीं है जिसे सरकारी सहायता के बिना लागू किया जा सकता हो। और जो सरकार जान-मान अपनी प्रजाके शोषणपर ही आधारित है वह कभी भी इन प्रस्तावित परिवर्तनोंको उस तत्परता से जो जल्दी कोई नतीजा दिखा सकने के लिए आवश्यक है लागू नहीं करना चाहेगी और चाहेगी भी तो कर नहीं सकेगी। वह करोड़ों रुपये के खर्च से संघ सकनेवाली विशाल सिंचाई योजनाओंको तो हाथमें ले सकती है लेकिन कुछ लाख रुपयेके खर्च से संघ सकनेवाला कुओंकी खुदाईका काम हाथमें नहीं लेगी। इसलिए प्रोफेसर वकील सबसे पहले जो चीज चाहते हैं वह है जल्दी स्वराज्य दिला सकनेवाला कार्यक्रम, और स्वराज्य पाने में मुख्य भूमिका अदा करनेके बाद फिर उन्हें इस देशकी गरीबीको निकाल बाहर करने के लिए खोले गये विभागका मुख्य अधिकारी नियुक्त किया जा सकता है।