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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 38.pdf/३७९

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३७८. पत्र : वि० ल० फड़केको
रविवार, ६ जनवरी १९२९
 

भाई मामा,

तुम्हारा पोस्टकार्ड मिल गया है। मैं यहाँ कल रातको पहुँचा। जग्गू और बहू- को लाना । उसे स्त्री निवास में रखूंगा । क्या अब भी घरके लिए मदद चाहिए ? यदि चाहिए तो कितनी ?

बापूके आशीर्वाद
 

गुजराती (जी० एन० ३८२२) की फोटो नकलसे ।

३७९. सन्देश : भारतीय ईसाइयोंके नाम'

[ ७ जनवरी, १९२९ के पूर्व ]
 

यदि भारतीय ईसाई, ईसाई होने के कारण भारतीयता छोड़ना नहीं चाहते तो उन्हें चरखके सन्देशपर ध्यान देकर अपनेको सभी राष्ट्रीय आन्दोलनों और करोड़ों भूखे लोगों के साथ एक कर लेना चाहिए ।

अंग्रेजीसे ]

हिन्दू, ७-१-१९२९

३८०. पत्र : मीराबहनको

७ जनवरी, १९२९
 

चि० मीरा,

अधिक लिखनेके लिए समय नहीं है, इसलिए केवल यही कहना है कि दिल्ली तक और वहाँसे आश्रम तककी यात्रा बहुत ही आरामदेह रही ।

आशा है, तुम्हारा समय शान्तिनिकेतनमें आनन्दसे बीता होगा ।

सप्रेम,

बापू
 

अंग्रेजी जी० एन० ९३८४ से; तथा सी० डब्ल्यू० ६३२९ से भी ।

सौजन्य : मीराबह्न

१. यह सन्देश कलकत्ताके गार्जियन द्वारा भेजा गया था।