सामग्री पर जाएँ

पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 38.pdf/४०

विकिस्रोत से
यह पृष्ठ जाँच लिया गया है।
सम्पूर्ण गांधी वाङ्मय

 

इससे पहले मैं नहीं जाऊँगा। मैं तबतक नहीं जाऊँगा जबतक मुझे जनतापर अपनी शक्तिका विश्वास नहीं हो जाता। मैं फिरसे भारतका नेतृत्व तबतक नहीं कर सकता, जबतक मुझे यह नहीं लगता कि मेरे नेतृत्वको स्वीकार करनेवालोंकी संख्या इतनी ज्यादा है कि उनके बलपर अहिंसाको नीतिका पालन किया जा सकेगा और जबतक मुझे यह नहीं महसूस होता कि मैं उन लोगोंको नियन्त्रणमें रख सकता हूँ। लेकिन, इस समय तो मुझे उसके कोई आसार दिखाई नहीं देते। इसलिए मुझे नेतृत्व करनेकी अभी कोई उत्सुकता नहीं है। शायद वह दिन मेरे जीवन कालमें न आये। हो सकता है, वह मेरे उत्तराधिकारीके समय में आये।

मैं इस समय किसी उत्तराधिकारीका नाम नहीं ले सकता। भारतमें ऐसा कोई व्यक्ति अवश्य होगा जो आज देशका नेतृत्व कर सकता है, लेकिन मैं उसका नाम नहीं ले सकता। सचमुच मुझे इस प्रकार निष्क्रिय रहनेपर शर्म आनी चाहिए, लेकिन शायद मेरे जीवन कालमें यह जरूरी हो। हो सकता है ऐसा कोई व्यक्ति कभी सामने आये, लेकिन अभी नहीं है।

[अंग्रेजी से]

हिन्दुस्तान टाइम्स, ३-११-१९२८

६. तार: मीराबहनको

साबरमती
३ नवम्बर, १९२८

मीराबहन
मारफत खादी भण्डार
मुजफ्फरपुर

तुम अपना बाकी समय बिहार और बंगाल में व्यतीत कर सकती हो। स्वास्थ्य विलकुल ठीक रखना। भाग-दौड़ करनेकी कोई जरूरत नहीं।

बापू

अंग्रेजी (सी॰ डब्ल्यू॰ ५३२१ तथा जी॰ एन॰ ८२११) से।

सौजन्य: मीराबहन