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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 38.pdf/४०५

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४०४. पत्र : रामेश्वरदास पोद्दारको

रविवार [ १३ जनवरी १९२९]
 

भाई रामेश्वरदास,

तुमारा पत्र मीला है। धीरज रखो। राम स्मरण करो । सब दोष वह नीकाल देगा ।

बापुके आशीर्वाद
 

जी० एन० १९८ की फोटो नकलसे ।

सौजन्य : नेशनल आर्काइव्ज ऑफ इंडिया

४०५. पत्र : घनश्यामदास बिड़लाको

१४ जनवरी १९२९
 

माईश्री घनश्यामदासजी,

आपका तार मीला था । पत्र भी मीला है। लालाजी स्मारक के लीये मैं इस मासके अंतमें सिंध जा रहा हुं । कलकत्ते में आपने कुछ इक्टठा कीया ?

दुग्धालयके बारेमें एक मद्रासीका नाम मैंने दीया था उसको पत्र लीखा ? यदि वह अनुकूल न लगे तो दूसरे नाम मैं दे सकता हूँ ।

खादी भंडारके बारेमें जो उसका उद्देशय है उसको मत भूलीयेगा । केवल वणिक वृत्तिसे न चलना चाहिए। भंडारको परमार्थिक दृष्टिसे चलाना है ।

मेरा स्वास्थ्य अच्छा है । आजकल मेरा खोराक १५ तोला बादामका दूध, १४ तोला रोटी ( भीगी ), सबजी, टमाटा कच्चा, अलसीका तेल ४ तोला । दो तोला आटेकी रबड़ी प्रातः कालमें । यहां फल छोड़ दीये है । एक हफ्ते में १।। रतल वजन बढ़ा है ।

शक्ति ठीक है ।

आपका,
 
मोहनदास
 

सी० डब्ल्यू० ६१५२ से ।

सौजन्य : घनश्यामदास बिड़ला


१. डाककी मुहरसे।