४०४. पत्र : रामेश्वरदास पोद्दारको
भाई रामेश्वरदास,
तुमारा पत्र मीला है। धीरज रखो। राम स्मरण करो । सब दोष वह नीकाल देगा ।
जी० एन० १९८ की फोटो नकलसे ।
सौजन्य : नेशनल आर्काइव्ज ऑफ इंडिया
४०५. पत्र : घनश्यामदास बिड़लाको
माईश्री घनश्यामदासजी,
आपका तार मीला था । पत्र भी मीला है। लालाजी स्मारक के लीये मैं इस मासके अंतमें सिंध जा रहा हुं । कलकत्ते में आपने कुछ इक्टठा कीया ?
दुग्धालयके बारेमें एक मद्रासीका नाम मैंने दीया था उसको पत्र लीखा ? यदि वह अनुकूल न लगे तो दूसरे नाम मैं दे सकता हूँ ।
खादी भंडारके बारेमें जो उसका उद्देशय है उसको मत भूलीयेगा । केवल वणिक वृत्तिसे न चलना चाहिए। भंडारको परमार्थिक दृष्टिसे चलाना है ।
मेरा स्वास्थ्य अच्छा है । आजकल मेरा खोराक १५ तोला बादामका दूध, १४ तोला रोटी ( भीगी ), सबजी, टमाटा कच्चा, अलसीका तेल ४ तोला । दो तोला आटेकी रबड़ी प्रातः कालमें । यहां फल छोड़ दीये है । एक हफ्ते में १।। रतल वजन बढ़ा है ।
शक्ति ठीक है ।
सी० डब्ल्यू० ६१५२ से ।
सौजन्य : घनश्यामदास बिड़ला
१. डाककी मुहरसे।