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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 38.pdf/४०७

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पत्र: मणिलाल और सुशीला गांधीको

लगता है कि मैं ठीक राय बनानेंमें तुम्हारी मदद कर सकूंगा । और किसीकी भी राय तुम्हारी रायसे नहीं मिलती ।

यहाँ के हालचाल ठीक हैं। भोजनालय में पहलेसे अच्छी व्यवस्था है । रोटीमें अब लगभग कोई खामी नहीं रहती । छोटेलाल रोटी बनानेके बारेमें अधिकसे-अधिक सही जानकारी लेकर लौटा है। सुरेन्द्र भी कुछ दिनोंमें वापस आ जायेगा ।

मैं यहाँसे इसी महीनेकी ३१ तारीखको सिन्धके लिए रवाना हो रहा हूँ । १५ फरवरीको लौटूंगा । तुम्हें सिन्ध कार्यक्रमकी तिथियाँ समयपर मिल जायेंगी ।

मैंने खोया हुआ वजन फिर पूरा कर लिया है और आधा पौंड बढ़ा भी लिया है । कल पुस्तकालयके कार्यक्रमके बाद वजन लिया था - ९५ ।। पौंड निकला । फलोंका स्थान टमाटरने लिया है। नींबू भी नहीं लेता ।

सस्नेह,

बापू
 

अंग्रेजी जी० एन० ९३८४ से; तथा सी० डब्ल्यू० ५३३० से भी ।

सौजन्य : मीराबहन

४०८. पत्र : मणिलाल और सुशीला गांधीको

१४ जनवरी, १९२९
 

चि० मणिलाल और सुशीला,

तुम्हारा पत्र मिल गया है । बहुत काम होनेके कारण एक डाकसे पत्र नहीं भेज सका ।

यदि धैर्यबालाका नाम मुझे देना हो तो मैं उसका नाम सीता रखूं । पवित्र नाम है । उच्चारण वहाँके सम्बन्धियोंके लिए आसान होगा और यह उन गुणोंका वाचक है जिनकी हम इच्छा करते हैं। दूसरोंका भी विचार किया है, किन्तु मुझे और कोई नाम इतना अच्छा नहीं लगा ।

अब शास्त्रीके विषयमें क्यों लिखना है ? नया एजेंट कैसा चल रहा है यह लिखते रहना । उसे मैं जानता नहीं हूँ इसलिए उसके बारेमें एक पंक्ति भी नहीं लिखी। दूसरे जो विवरण प्राप्त हुए हैं वे अच्छे नहीं हैं। उनसे हम कोई राय नहीं बना सकते। यह भी सम्भव है कि वह वहाँ अपने अच्छे गुणोंका ही प्रदर्शन करेगा । तुममें से कोई पहलेसे ही उसके विरुद्ध गलत धारणा न बना लेना ।

मेरी तबीयत ठीक चल रही है । आजकल बकरीका दूध और फल लेना छोड़ दिया है । फल लेना तो यहाँ आकर ही छोड़ा है। उनके बदले टमाटर और दूधके बदले बादामका दूध लेता हूँ ।

१. मणिलाल और सुशीला गांधीकी पुत्री ।

२. सर कूर्म वेंकट रेड्डी जो श्री शास्त्रीके स्थानपर २८ जनवरी, १९२९ को दक्षिण आफ्रिकामें एजेंट नियुक्त हुए थे ।