है ? इसका उत्तर देने दीजिए श्रीमती सरोजिनी देवीको जिन्होंने अपने अत्यन्त सुन्दर बेशकीमती विदेशी वस्त्र त्यागे और वे अन्य बहनें भी इसका उत्तर देंगी जिन्होंने प्रेमसे सहेज-सहेज कर रखे हुए अपने कीमती विदेशी रेशमी वस्त्र और दूसरी नफीस चीजेंतक त्याग दी थीं। आज भी कांग्रेसवालोंको शराबकी दूकानोंपर और अफीमके ठेकोंपर धरना देने तथा विदेशी कपड़े इकट्ठा करके उसकी होली जलानेसे रोकने वाली कोई चीज नहीं है । इन दो शक्तिशाली कामोंमें सामाजिक और आर्थिक महत्त्वके अलावा पहले दर्जेका राजनीतिक महत्त्व भी भरा पड़ा है। अगर हम विदेशी वस्त्रोंके बहिष्कारमें सफल हो जाते हैं तो ब्रिटेनके रास्तेसे लोभका बड़े से बड़ा कारण हट जायेगा । और अगर हम शराब तथा दूसरी नशीली चीजोंसे होनेवाली उसकी मालगुजारीको बन्द करा देते हैं, तो हमारे शासक सुरसाकी तरह सदा बढ़ते फौजी खर्चको घटानेपर बाध्य हो जायेंगे । ये दो बातें इतनी सरलतासे पूरी की जा सकती हैं और विशाल जन समुदायकी कार्य-शक्तिके उचित उपयोगके लिए इतनी उपयुक्त हैं कि अगर हम उन्हें सम्पन्न कर सकें तो मेरा विश्वास है कि हम अपने राष्ट्रीय उद्देश्यकी पूर्तिकी एक बड़ी मंजिल तय कर लेंगे ।
मैं दावेके साथ कहता हूँ कि यह कार्यक्रम इतना विशाल और व्यापक है कि वह सभी तरहकी रुचि रखनेवालोंको सन्तोष दे सकेगा और सारे राष्ट्रको काम जुटा देगा ।अगर हमारे पास पर्याप्त कार्यकर्त्ता हों तो हम सभी कामोंको एक ही साथ शुरू कर सकते हैं; और अगर थोड़े हों तो हम एक समय में एक ही काम हाथमें लें ।
पर, मेरे विचारसे इस कार्यक्रमको रुचिकर बनानेके लिए एक यह महत्त्वपूर्ण शर्त जरूरी है कि अपने ध्येयको पानेके लिए, फिर वह स्वराज्य हो, औपनिवेशिक स्वराज्य हो या पूर्ण स्वतन्त्रता • हममें अहिंसाके प्रति जीवन्त आस्था होनी चाहिए। शीघ्र ही हिंसाकाण्डमें प्रवृत्त कर देनेवाला कार्यक्रम तैयार करना कोई कठिन कार्य नहीं है, लेकिन वह तो मेरी दृष्टि और मेरी क्षमताके परे है।
[ अंग्रेजीसे ]
यंग इंडिया, १७-१-१९२९