४१६. पत्र : जवाहरलाल नेहरूको
प्रिय जवाहर,
तुम्हारा पत्र मिला ।' संयुक्त प्रान्तके दौरेके बारेमें मैं तुम्हें पहले ही लिख चुका हूँ। यह पत्र मैं कृपलानीके बारेमें लिख रहा हूँ । जमनालालजीने मुझे बताया है कि तुम चाहते हो कि कृपलानी तुम्हारे अधीन संगठनका कार्य सँभाल लें, यानी वह कार्य जो शीतलासहाय कर रहे थे; और उसे जितना बढ़ा सकते हैं बढ़ायें । तुम्हारे जिस पत्रका मैं उत्तर दे रहा हूँ उससे मुझे वैसा कोई आभास नहीं मिलता । मैं समझता हूँ कि कृपलानी स्वयं तुम्हें लिख चुके हैं । चूंकि, जमनालालजीके पत्रके आधारपर तुम्हारा पत्र मिलने से पहले ही मैंने और शंकरलालने भी उनसे बात शुरू कर दी थी इसलिए अब मुझे लिखो कि इस विषयमें तुम ठीक क्या करना चाहते हो ।
यदि मैं निकट भविष्य में संयुक्त प्रान्तका दौरा न करूँ और यदि तुम एक दो दिनके लिए ही साबरमती आ सको, तो हम बहुत-सी बातोंपर विचार-विमर्श कर सकते हैं ।
कमलाके बारेमें डाक्टरकी रिपोर्टोंपर, वे चाहे अनुकूल हों या प्रतिकूल, मेरा बिलकुल विश्वास नहीं है । मैं चाहता हूँ कि तुम और पिताजी और कमला यह निश्चय कर लें कि उसकी प्राकृतिक चिकित्सा करानी है, यानी कूनेका स्नान और सूर्यस्नान । सूर्यस्नानोंका अब डाक्टरी चिकित्सा तकमें चलन हो गया है और यह दावा किया जाता है कि सूर्य स्नानोंका असाधारण परिणाम होता है ।
यदि आवश्यक हो तो कृपलानीके बारेमें तार दे देना ।
अंग्रेजी (एस० एन० १५२७६) की फोटो नकल तथा गांधी-नेहरू पेपर्स १९२९ ।
सौजन्य : नेहरू स्मारक संग्रहालय तथा पुस्तकालय
१. दिनांक १२-१-१९२९ का ( एस० एन० १५२७७ ) ।
२. देखिए " पत्र : जवाहरलाल नेहरूको ",१२-१-१९२८ ।