हालाँकि मैं तुमको पहले ही लिख चुका था कि मैं ३१ तारीख तक यहाँसे रवाना नहीं होऊँगा और ब्योरेवार कार्यक्रम तुमको बादमें भेज दिया जायेगा, फिर भी तुम्हारे तारके जवाबमें मैंने एक तार तुमको भेजा था ।
तुमको अपना जुकाम तेज चालसे घूमना शुरू करके ठीक कर लेना चाहिए । दूधके लिए रुकनेकी कोई जरूरत नहीं । पानी गरम करके उसे नींबूके साथ या उसके बिना भी पीने से शरीरमें थोड़ी देरके लिए गरमी आ जायेगी । फिर जितनी गर्मीकी जरूरत है घूमनेसे मिल जायेगी। भले पन्द्रह मिनट ही क्यों न घूम पाओ, घूमने अवश्य जाओ ।
यह पत्र मैंने कल रात बोलकर लिखवाया था । अब तुम्हारी बीमारीके बारेमें तुम्हारा तार भी मिल गया है । चिन्ता मत करना । तुम जल्दी ही अच्छी हो जाओगी । कल ही तार द्वारा मैंने तुमको हिदायतें भेजी हैं। मेरे स्वास्थ्यके बारेमें तुमको हर हफ्ते दो कार्ड और अगर बीमार पड़ गया तो एक कार्ड मिलता रहेगा ।
ईश्वर तुम्हारी सहायता करे।
सप्रेम,
बापू
अंग्रेजी जी० एन० ९३८८ से; सी० डब्ल्यू० ५३३३ से भी ।
सौजन्य : मीराबहन
४२६. पत्र : हैरॉल्ड एफ० बिंगको
सत्याग्रह आश्रम
साबरमती
१८ जनवरी, १९२९
प्रिय मित्र,
आपका पत्र मुझे मिल तो गया था, पर मैं उसे आज ही खोल पाया हूँ ।
देखता हूँ कि आप मेरा सन्देश १५ तारीख तक पाना चाहते थे; और आज १८
तारीखको मैं इसका जवाब बोलकर लिख रहा हूँ । इसीलिए मैं इसके द्वारा आपको
सन्देश न भेज पानेके लिए खेद प्रकट कर रहा हूँ ।
हृदयसे आपका,
अंग्रेजी (एस० एन० १४९८८) की फोटो - नकलसे ।
१. देखिए " तार : मीराबहनको ", १६-१-१९२९ ।
२. देखिए " तार : मीराबहनको ", १७-१-१९२९ ।
३. भारतीय युवकों और भारतीय समस्याओंकी चर्चाके लिए प्रकाशित यूथके एक विशेषांकके लिए
(एस० एन० १५०८५) ।