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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 38.pdf/४३३

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४३७. पत्र : एन० मेरी पोटर्सनको

सत्याग्रह आश्रम

साबरमती

२० जनवरी १९२९

प्रिय मारिया,

इतने लम्ब अरसेके बाद तुम्हारा पत्र पाकर बड़ी प्रसन्नता हुई । मैं सक्रिय राज- नीतिमें कूद ही पड़ा हूँ ऐसा एकदम निश्चित नहीं कहा जा सकता । मैं खुद नहीं जानता कि इस वर्ष मुझे कौन-सी भूमिका निभानी पड़ेगी। अगले महीने शायद कुछ निश्चित हो सके ।

मेरे आहार सम्बन्धी प्रयोगको लेकर तुम्हारी चिन्ता व्यर्थ है । विश्वास रखो कि मेरा यह प्रयोग भी ईश्वरके ही मार्गदर्शन में चल रहा है । मैं तो यही समझता हूँ ।

अवधिके बारेमें तुम्हारा अनुमान बिलकुल ठीक है । देखना है कि वर्षका अन्त हमें क्या दिखाता है ।

दुःखकी बात है कि एस्थर अबतक पूर्ण स्वस्थ नहीं हो पाई। उसके 'एपेण्डि- साइटिस' के आपरेशनकी बात मुझे मालूम थी । मेनन जितना कुछ कर रहा है उससे कमकी उससे आशा भी नहीं थी । पर खुशी इस बातकी है कि हमारी आशाकी कसौटीपर वह पूरा उतरा है।

यूरोप यात्राके बारेमें तुम्हारा अनुमान सही है । दस दिनके बाद ही मैं कह सकूंगा कि मैं यूरोप जाऊँगा या नहीं। लेकिन तुम्हारा कहना बिलकुल ठीक है । मुझे स्वतन्त्र भारतके प्रतिनिधिकी हैसियतसे ही यूरोप जाना चाहिए। पर इसमें भी होगा वही जो ईश्वरको मंजूर है ।

डेनिश बहिनें यहीं हैं । वे पिछले ४ या ५ दिनसे यहीं हैं और यहाँ आश्रम में एक सप्ताहतक रहनेवाली हैं।

हृदयसे तुम्हारा,

कुमारी मेरी पीटर्सन
नेशनल क्रिश्चियन गर्ल्स स्कूल्स
पोर्टो नोवो (दक्षिण भारत )

अंग्रेजी (एस० एन० १५१४१ ) की फोटो - नकलसे ।