४३८. पत्र : प्र० च० घोषको
सत्याग्रह आश्रम
साबरमती
२० जनवरी, १९२९
आपका पत्र मिला । आपकी बीमारीकी बात पढ़कर बड़ा दुखी हुआ । मैं अभी निश्चित तौरपर नहीं कह सकता कि कांग्रेस कार्यक्रमके सिलसिले में इस वर्ष मुझे कौन-सा पार्ट अदा करना पड़ेगा । मुझसे अपेक्षा की जाती है कि मैं विदेशी वस्त्रोंके बहिष्कार के बारेमें कार्यकारिणीको सलाह दूं । मैं इस सिलसिले में एक योजना बना रहा हूँ। मैं पण्डित मोतीलालजीसे पत्रव्यवहार कर रहा हूँ । यदि मैंने कोई काम हाथमें लिया तो मैं चाहूँगा ही कि आप उसमें हाथ बँटायें । मैं जानता हूँ कि आप भली-भाँति समझते हैं कि मुझे आपसे कितनी आशाएँ हैं ।
हृदयसे आपका,
अंग्रेजी (एस० एन० १५२८३) की फोटो नकलसे ।
४३९. पत्र : डा० सत्यपालको
सत्याग्रह आश्रम
साबरमती
२० जनवरी, १९२९
आपका पत्र मिला । आप जितना कुछ करना चाहते हैं सो सब बतला दीजिए । मैं तो चाहता था कि पंजाबका दौरा कर लेता । लेकिन इस वर्षका मेरा कार्यक्रम अभी बड़ा अनिश्चित है । मैं पण्डित मोतीलालजीसे लिखा-पढ़ी कर रहा हूँ ।
आशा है कि इस महीने के अन्ततक मैं निश्चित कर लूंगा ।
१. श्री घोषने १९२९ और १९३० के लिए निश्चित कार्यक्रमके बारेमें जानकारी माँगी थी
(एस० एन० १५२८२ ) ।
२. देखिए " खादीके जरिए विदेशी वस्त्र- बहिष्कारकी योजना " २४-१-१९२९ ।