४४४. पत्र : वी० सूर्यनारायणमूर्तिको
सत्याग्रह आश्रम
साबरमती
२२ जनवरी, १९२९
आपका पत्र मुझे मिल गया है। आप चाहें तो बयान देनेसे इनकार कर सकते हैं; पर बयानमें असत्य कोई बात नहीं कहनी चाहिए ।
हृदयसे आपका,
अंग्रेजी (एस० एन० १४८८०) की फोटो - नकलसे ।
४४५. पत्र : च० राजगोपालाचारीको
सत्याग्रह आश्रम
साबरमती
२२ जनवरी, १९२९
आपका पत्र मिल गया । इस बारके 'यंग इंडिया' से आपको मालूम हो जाएगा कि मैंने विदेशी वस्त्रोंके बहिष्कारके बारेमें क्या किया है। आपको उसी
१. वी० सूर्यनारायणमूर्तिने एक मुकदमे के सिलसिले में गांधीजीकी सलाह माँगी थी कि उनको अदालत में बयान देना चाहिए या नहीं। पत्रमें लिखा था : " मेडिकल कालेजके एक विद्यार्थीने अपनी पत्नीको जहर देकर मार डाला था। वह अब हिरासत में है अभियुक्तकी एक चाची पदवानेके लिए एक पत्र मेरे पास लाई थी; उसमें विद्यार्थीको पत्नीकी हत्याके लिए प्रेरित किया गया था। पूरी इबारत सुननेके बाद उस महिलाने पत्र नष्ट कर दिया था। पुलिसको उस पत्रको गन्ध मिल गई और उसने मामलेके बारेमें मुझसे पूछताछ की। मैंने पत्र में जो कुछ भी पढ़ा था, उनको बतला दिया। कई बड़े-बड़े आदमी अभियुक्तको बचाना चाहते हैं और इसीलिए मुझसे आग्रह कर रहे हैं कि मैं अब अदालतके सामने सचाईं न खोलूँ । कृपया मुझे सलाह दीजिए कि अपनी परीक्षाकी इस घदोंमें मैं क्या करूँ" (एस० एन० १४८७९) ।
२. देखिए " खादीके जरिए विदेशी वस्त्र- बहिष्कारकी योजना ", २४-१-१९२९ ।