उसकी मजदूरी हो । लेकिन खादी सेवामें आर्थिक लाभसे कहीं ऊँचा एक सन्तोष यह मिलता है कि खादी सेवक जानता है कि वह उन लोगोंकी सेवा कर रहा है, जिन्हें सेवाकी ज्यादासे ज्यादा जरूरत है, जो अत्यन्त असहाय हैं और देशमें जिसकी संख्या विशाल है ।
जैसे-जैसे इस सत्यकी प्रतीति होती जाती है, वैसे-वैसे खादी सेवक अपनी इस थातीको सुदृढ़ बनानेके तरीके और साधन खोजने में जुट जाते हैं। इसीके फलस्वरूप खादी सेवाके उम्मीदवारोंकी, जो उद्योग-मन्दिर (सत्याग्रह आश्रम) में तालीम पा रहे हैं, एक साधारण साप्ताहिक बैठकमें खादी सेवा संघ नामक संस्थाकी स्थापनाके प्रश्न- पर गम्भीरतापूर्वक चर्चा की गई और उसे स्थापित करनेका निर्णय किया गया । इस निर्णयको मद्देनजर रखते हुए मैं उन तमाम सज्जनोंको, जिन्होंने अखिल भारतीय चरखा-संघ द्वारा स्वीकृत किसी भी संस्था में खादी-सम्बन्धी तालीम पाई हो, निमन्त्रण देता हूँ कि वे उद्योग-मन्दिरके मन्त्रीके पास नीचे लिखी बातें लिख भेजें: पूरा नाम, वर्तमान पता, उम्र, विवाहित या अविवाहित, बच्चे हों तो उनकी तादाद, खादी सेवाकी तालीम कहाँ पाई, पहलेकी योग्यता, वर्तमान पेशा, वेतन या मजदूरी और इसी किस्म- की दूसरी सूचनाएँ, जो प्रस्तावित संघके लिए उपयोगी हों । इस सम्बन्धमें शीघ्र ही एक अस्थायी मण्डल कायम करने और अस्थायी नियमावली तैयार करनेका प्रयत्न किया जायेगा । उस मण्डलका ध्येय यह होना चाहिए :
१. सेवा-संघसे सम्बन्ध रखनेवाले स्त्री-पुरुषों में पारस्परिक सम्पर्क और सहयोग बढ़ाना ।
२. खादी - कार्यके तमाम विभागों में शोधका काम करनेके लिए उन्हें उत्साहित करना ।
३. जरूरतमन्द सदस्योंकी सहायता करना ।
४. नये सदस्योंको अपनी ओर आकृष्ट करना ।
५. एक-दूसरे से सलाह-मशविरा करन और अनुभवोंका विनिमय करनेके लिए समय- समयपर सम्मेलन बुलाना ।
६. सेवाकी दृष्टिसे खादीको अधिक लोकप्रिय बनाने के तरीके खोजना ।
ये इधर-उधर से इकट्ठे किये हुए सुझाव मात्र हैं । इस दिशा में सबसे पहला काम खादी सेवकों के नाम और पतोंकी सूचीका प्रकाशन करना होगा । आजतक आश्रम में जितने विद्यार्थी इस तरह की तालीम पा चुके हैं उनकी कुल तादाद ४४५ है । इसमें शक नहीं कि देशकी दूसरी खादी-संस्थाओं में प्रशिक्षण प्राप्त लोग भी काफी होंगे; अतः यह सूची कोई छोटी-मोटी सूची नहीं होगी । मुझे उम्मीद है कि केवल वही लोग सावधान होकर अपने नाम भेजेंगे, जो या तो खादी-कार्य कर रहे हैं, करते थे या जिन्होंने इसकी पर्याप्त शिक्षा पाई है और जो इस सेवामें स्वयंसेवकके सेवाभावसे ही सम्मिलित हुए हैं। इस विचारको जन्म देनेवालों और इसका प्रचार करनेवालोंकी तो यह इच्छा है कि वे इस संघको सच्चे सेवकोंका एक उपयोगी, कार्यक्षम संगठन