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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 38.pdf/४४६

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सम्पूर्ण गांधी वाङ्मय

बनायें । आशा है, इसके जवाब में लिखनेवाले सज्जन संघकी सदस्यताकी शर्त और ध्येय आदिके बारेमें अपने-अपने सुझाव भी लिख भेजेंगे ।

[ अंग्रेजीसे ]
यंग इंडिया, २४-१-१९२९

४५६. सविनय अवज्ञाका कर्त्तव्य

गुजरात कॉलेजके लगभग सात सौ विद्यार्थियोंको हड़ताल शुरू किये बीस दिनसे ज्यादा हो चुके हैं । इस हड़तालका महत्व अब केवल स्थानीय नहीं बच रहा है । मजदूरोंकी हड़ताल काफी बुरी चीज होती है, लेकिन विद्यार्थियोंकी हड़ताल - फिर वह उचित कारणोंसे शुरू हुई हो या अनुचित कारणोंसे - उससे भी अधिक हानिकर होती है । इस हड़तालसे आखिर जो नतीजे निकलेंगे, उनकी दृष्टिसे यह हड़ताल और भी हानिकर है; और यह समाजमें दोनों पक्षोंकी पद-प्रतिष्ठाकी दृष्टिसे भी बहुत हानिकर है । मजदूर अनपढ़ होते हैं; विद्यार्थी शिक्षित होते हैं और हड़तालोंसे उनका मन्शा किसी तरहका आर्थिक लाभ उठाना नहीं होता । फिर मिल-मालिकोंकी भाँति, शिक्षा-संस्थाओंके मुख्य अधिकारियोंका कोई भी हित विद्यार्थियोंके हितके विरुद्ध नहीं पड़ता। इसके अलावा, विद्यार्थी तो अनुशासनकी प्रतिमूर्ति समझे जाते हैं । इस कारण विद्यार्थियोंकी हड़तालके परिणाम बहुत व्यापक होते हैं और असाधारण परिस्थितियोंमें ही उनकी हड़तालके औचित्यका समर्थन किया जा सकता है ।

लेकिन जहाँ सुव्यवस्थित स्कूल और कालेजोंमें विद्यार्थियोंकी हड़तालके अवसर बहुत थोड़े ही हो सकते हैं, वहीं ऐसे कुछ अवसरोंकी कल्पनाकी भी जा सकती है जब विद्यार्थियोंके लिए हड़ताल कर देना उचित हो । मसलन, कोई प्रधानाचार्य जनताकी रायके खिलाफ कार्रवाई करके किसी देशव्यापी उत्सव या त्योहारके दिन छुट्टी देनेसे इनकार कर दे और यह त्योहार ऐसा हो कि जिसके लिए पाठशाला या कालेजमें जानेवाले विद्यार्थी और उनके माता-पिता दोनों छुट्टी चाहते हों, तो ऐसी हालत में उस दिनके लिए हड़ताल कर देना विद्यार्थियोंके लिए उचित होगा । जैसे- जैसे विद्यार्थीगण अपनी राष्ट्रीय जिम्मेदारीको समझने में अधिक जागृत और विचारशील बनते जायेंगे वैसे-वैसे भारतमें ऐसे अवसरोंकी तादाद भी बढ़ती जायेगी ।

गुजरात कालेजके सम्बन्धमें, मैं जहाँतक निष्पक्ष होकर विचार कर सका हूँ, मुझे विवश होकर कहना पड़ता है कि हड़तालके लिए विद्यार्थियोंके पास काफी कारण थे । लोगोंका यह कथन बिलकुल गलत है, जैसा कि कई बार कहा गया है, कि हड़ताल चन्द उत्पाती विद्यार्थियोंने करा दी है। मुट्ठी भर उत्पात मचानेवालोंके लिए लगभग सात सौ विद्यार्थियोंको दो सप्ताहसे भी अधिक समयके लिए एकत्र कर रखना असम्भव है। सच तो यह है कि कुछ जिम्मेदार नागरिक विद्यार्थियोंकी रहनुमाई कर रहे हैं और उन्हें सलाह देते हैं । इन सलाहकारोंमें श्रीयुत मावलंकर मुख्य हैं । वे एक अनुभवी वकील हैं और अपनी बुद्धिमत्ता तथा संयमके कारण प्रसिद्ध हैं । श्रीयुत