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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 38.pdf/४५१

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४५९. पत्र : शान्तिकुमार मोरारजीको

आश्रम

साबरमती

२४ जनवरी १९२९

प्रिय शान्तिकुमार,

तुम्हारा पत्र मिला। मैं यहाँ बुधवारतक हूँ, इसलिए मैं कृष्णमूर्ति से मंगलवार या बुधवारको ही मिल सकता हूँ। गुरुवारकी सुबह मैं कराचीके लिए चल दूँगा ।

क्या फरवरीके महीने में कलकत्ता या मद्राससे तुम्हारा कोई स्टीमर चलता है;

यदि हाँ, तो वह मद्राससे रंगून या कलकत्तासे रंगून तककी यात्रामें कितना समय लेता है ? मेरी इच्छा तो बहुत है पर १० दिनका समय निकालना मेरे लिए कठिन हो जायेगा। यह भी लिखना कि बम्बई और रंगूनके बीच तुम्हारा स्टीमर किन-किन बन्दरोंपर कितने-कितने समय रुकता है ।

तुमने बी० आई० कम्पनीके स्टीमरोंके बारेमें पता लगाने-न-लगानेके बारेमें भी पूछा है ? क्या यह बम्बई और रंगूनके बीचकी यात्राके लिए ? अगर बम्बई से रंगून स्टीमर चलते हैं, तो क्या उनकी सेवा नियमित है, वे कितना समय लेते हैं और बम्बईसे रंगून तकका किराया कितना है ?

बापूके आशीर्वाद'

[ पुनश्च : ]

मुझे यह जानकर खुशी हुई कि तुम्हारे पिताजीका आपरेशन अच्छी तरह सम्पन्न हो गया।

अंग्रेजी (सी० डब्ल्यू ० ४७९३) से ।
सौजन्य : शान्तिकुमार मोरारजी


१ और २. ये पंक्तियाँ गुजराती में हैं।
३८-२७