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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 38.pdf/४५२

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४६०. पत्र : जी० वी० गुरजालको '

आश्रम

साबरमती

२४ जनवरी, १९२९

प्रिय मित्र,

आपका पत्र मिला । आप श्रीयुत चक्रवर्ती राजगोपालाचारी (गांधी आश्रम, तिरुचेन्गोडु) से पत्र-व्यवहार करें। आपका पत्र मैंने उनके पास ही भेज दिया है ।

{{Right|हृदयसे आपका,}{

मो० क० गांधी

अंग्रेजी (जी० एन० १३८०) की फोटो - नकलसे ।

४६१. पत्र : मन्त्री, अखिल भारतीय चरखा संघको

आश्रम

साबरमती

{{Right|२४ जनवरी, १९२९

मन्त्री
अखिल भारतीय चरखा संघ
अहमदाबाद
प्रिय महोदय,

आपकी पूछताछके सन्दर्भ में । अभी यह बतलाना मुश्किल है कि आन्ध्र जाने पर मैं उत्कलके दौरेके लिए भी कुछ दिन दे पाऊँगा या नहीं । वे लोग मुझे कहाँ- कहाँ ले जाना चाहेंगे और कितना समय मुझसे चाहेंगे ?

हृदयसे आपका,

अंग्रेजी (एस० एन० १३२९४ ) की माइक्रोफिल्मसे ।

१. बादमें भिक्षु निर्मलानन्दके नामसे प्रसिद्ध ।