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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 38.pdf/४५७

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पत्र : जवाहरलाल नेहरूको

भारतके एक प्रतिनिधिको हैसियतसे आपके यूरोप जानेका कोई लाभ नहीं । आप तो अगले वर्ष स्वतन्त्र भारतके एक प्रतिनिधिकी हैसियत से ही वहाँ जाइए। " क्या ही अच्छा होता कि हमारा भी यही विश्वास होता और हम उसे फलीभूत करने के लिए समुचित प्रयास करते ।

क्या आप हिन्दू-मुस्लिम एकताके प्रश्नके बारेमें कुछ कर रहे हैं ?

अपनी सिन्ध-यात्राके कार्यक्रमकी एक प्रति मैं जवाहरको सिन्धके लिए ३१ तारीखको रवाना हो रहा हूँ ।"

हृदयसे आपका,

अंग्रेजी (एस० एन० १५३०४) की फोटो नकलसे ।

४६८. पत्र : जवाहरलाल नेहरूको

आश्रम

साबरमती

२४ जनवरी १९२९

प्यारे जवाहर,

यूरोप यात्राके बारेमें पिताजीके नाम लिखा मेरा पत्र पढ़ लेना । मैं चाहता हूँ कि तुम उसके बारेमें अपनी राय भी मुझे लिखो। इससे मुझे फैसला करने में मदद मिलेगी ।

कृपलानी के बारेमें तुम्हारा तार मुझे मिल गया । जमनालालजी और शंकरलाल दोनों ही को, खासकर जमनालालजीको कृपलानी बहुत भा गया है । उनको भरोसा नहीं कि सीतलासहाय ज्यादा कुछ कर पायेंगे। उनका ख्याल है यू० पी० में तीन सालके दौरान वे कुछ खास करके नहीं दिखा सके। मैं सीतलासहायसे बात करूँगा कि उनको इस सम्बन्धमें क्या कहना है । परन्तु कोई भी अन्तिम निर्णय करनेसे पहले मैं चाहूँगा कि सीतला सहायके बारेमें तुम्हारी राय जान लूँ । सिन्ध कार्यक्रमकी एक प्रति भेज रहा हूँ ।

हृदयसे तुम्हारा,

१. देखिए अगला शीर्षक ।

२. दिनांक २१-१-१९२९ का । उसमें कहा गया था : " आपका पत्र | कोई गलत धारणा बनी लगती है । मेरा ख्याल कि कृपलानी पूरी छानबीन करें, पुनर्गठनके लिए सुझाव दें। इस बीच स्थिति ज्यों-की-त्यों रखी जाये। लेकिन आपका हर सुझाव माननेको तैयार हूँ ।

३. अखिल भारतीय कताई संघकी संयुक्त प्रान्तीय शाखाके मन्त्री !