४२६ सम्पूर्ण गांधी वाङ्मय 'यंग इंडिया' सम्बन्धी साहित्यके बारेमें आपने जिस प्रस्तावका उल्लेख किया है, मेरे सामने ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं आया । होरेस जी० एलेक्जेंडर बरमिंघम, इंग्लैंड अंग्रेजी (एस० एन० १५०४४ ) की फोटो नकलसे । ४७२. पत्र : ए० डब्ल्यू ० कोहेंट मैसको हृदयसे आपका, सत्याग्रह आश्रम साबरमती प्रिय मित्र, २५ जनवरी, १९२९ आपका पत्र मिल गया । यदि मैं महसूस कर लूँ तो फिर मुझे अपनी गलती स्वीकारने में तनिक भी संकोच नहीं होता । आपके साथ हुई पूरी बातचीत तो मुझे याद नहीं है, परन्तु उसके जो विवरण आपने दिया है, उससे लगता है कि मैंने बहुत ही संक्षेप में बात की थी। अपने सामने पड़ा सारा काम और फिर मुलाकातियों के साथ लगनेवाला समय देखते हुए मुझे ऐसा करना ही पड़ता है। मुलाकातियों में से कई ऐसे होते हैं जो सचमुच समझते हैं कि एक सरसरी मुलाकात करके ही वे भारतीय समस्याओंकी समझ हासिल कर सकते हैं। मुझे याद है कि मैंने आपसे कहा था कि इस ढंगसे आप भारतीय समस्याओंको तो क्या, किसी भी समस्याको नहीं समझ सकते । इसलिए आपसे मेरा अनुरोध है कि आप मुझसे गलती माननेकी अपेक्षा रखनेकी बजाय मुझपर इस बात के लिए तरस ही खायें कि मैं अपने ऐसे मुलाकातियोंसे जो मिलनेका कोई समय पहलेसे तय किये बिना ही आकर बड़े-बड़े सवाल पूछने लगते हैं, ठीक तरहसे पेश आना नहीं जानता । ए० डब्ल्यू० कोहेंटमैस हेग, १४० ऐंटनी डाइकस्ट्रास हॉलैंड अंग्रेजी (एस० एन० १५०७५) की फोटो नकलसे । हृदयसे आपका, १. पत्र में शिकायत थी कि गांधीजी मुलाकात के दौरान बहुत अच्छी तरह पेश नहीं आये । अन्तिम वाक्य यह था “मैं जिस महात्माकी कल्पना किये था, उससे मेरी मुलाकात नहीं हुईं। "
पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 38.pdf/४६०
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