सामग्री पर जाएँ

पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 38.pdf/४६२

विकिस्रोत से
यह पृष्ठ अभी शोधित नहीं है।

४२८ सम्पूर्ण गांधी वाङ्मय यदि उसे पसन्द करते हैं तो अपनी संस्थाकी ओरसे निश्चय ही उसका चन्दा भिजवा सकते हैं । आप जानते ही हैं कि यंग इंडिया' मुनाफा कमानेके लिए तो निकाला नहीं जाता । यदि उससे कभी कोई मुनाफा मिलता भी है तो उसे किसीके व्यक्तिगत लाभके लिए नहीं, बल्कि संस्थागत सार्वजनिक कार्यके लिए ही प्रयुक्त किया जाता है । श्री ए० ए० शेख मॉमसेनस्ट्रास ४१ जर्मनी अंग्रेजी (एस० एन० १५१२४) की फोटो - नकलसे । ४७५. पत्र : केनैथ सांडर्सको हृदयसे आपका, सत्याग्रह आश्रम साबरमती २५ जनवरी, १९२९ प्रिय मित्र, आपका पत्र मिल गया । मेरे लिए किसी पुस्तकको पढ़नेका वचन देना जरा कठिन है । फिर भी यदि आप अपनी पुस्तक ' भेज ही देंगे तो आशा है कि मैं उसे सरसरी तौरपर देखनेके लिए कुछ मिनट निकाल सकूंगा । मैं 'यंग इंडिया' की दो जिल्दें और अपनी आत्मकथाकी एक प्रति आपको रजिस्टर्ड बुक पोस्ट से भेज रहा हूँ । श्री केनैथ सांडर्स हृदयसे आपका, हाई एस्क्रिस बर्कले केलिफोर्निया अंग्रेजी (एस० एन० १५१२६) की फोटो नकलसे । १. भारतीय जीवनके तौर-तरीकेके बारेमें। उन्होंने गांधीजीसे उसकी प्रस्तावना लिखनेका अनुरोध किया था।