है कि मैं ऐसे प्रत्येक विशेषाधिकार की पूरी-पूरी जाँच कराऊँ और जिसके भी बारे में यह निष्कर्ष निकले कि वह सर्वथा उचित या वैध रीति से प्राप्त नहीं किया गया था, वह तुरन्त छीन लिया जाना चाहिए।
हृदय से आपका,
श्री जे० डी० जैन्किन्स बम्बई
अंग्रेजी (एस० एन० १५१४९ ) की फोटो नकल से।
४८१. पत्र : जयरामदास दौलतराम को
आश्रम
साबरमती
२५ जनवरी, १९२९
प्रिय जयरामदास, आपका पत्र और कार्यक्रम प्राप्त हुए। मैं कार्यक्रम पर चलने की कोशिश करूँगा। मणिलाल आज सुबह रवाना हो गया।
कीकी बहन ने' लिखा है कि मैं कराची में उसी के यहाँ ठहरू। यह बहुत अच्छा रहेगा। मैं इसे पसन्द भी करूँगा; लेकिन मैं उसको लिख रहा हूँ कि मुझे स्वागत समिति के इन्तजाम के मुताबिक ही चलना पड़ेगा। दौरे की दृष्टि से आपको जो भी आवश्यक लगे, कीजिए। कृपलानीका आग्रह है कि मैं कीकी बहन के यहाँ ही ठहरूँ। वे आपको भी लिखेंगे। यदि मेरे ठहरने के स्थान से कुछ बनता-बिगड़ता न हो, तो मैं उसी के यहाँ ठहरना पसन्द करूँगा। गंगा बहन ने भी मुझे लिखा था और मैंने उसे स्वागत समिति से सम्पर्क करने के लिए लिख दिया है।
हृदय से आपका,
अंग्रेजी (एस० एन० १५३११) की फोटो नकल से।
१. आचार्य कृपलानीकी बहन।
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