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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 38.pdf/४६८

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४८२. पत्र : जुगलकिशोरको

आश्रम

साबरमती

२५ जनवरी, १९२९

प्रिय जुगलकिशोर, तुम्हारा पत्र मिल गया। मुझे लगता है कि 'यंग इंडिया' में तुम्हारे काम के बारे में अभी तक कुछ भी न लिख कर मैंने एक अपराध किया है। अब मैं तुम्हारा पत्र 'यंग इंडिया' सम्बन्धी कागजों के साथ रखे दे रहा हूँ; आशा है कि मैं अगले अंक में इस विषय में लिखूंगा ।'

तुम्हारा पत्र बारीकी से पढ़ने पर यदि मुझे कोई बात सूझी तो मैं तुम्हें एक पत्र और लिखूंगा ।

कृपलानी इस समय यहीं हैं।

हृदय से तुम्हारा,

श्रीयुत जुगलकिशोर

प्रधानाचार्य

प्रेम महाविद्यालय

वृन्दावन

अंग्रेजी (एस० एन० १५३१३) की माइक्रो फिल्म से।


४८३. पत्र : कोण्डा वेंकटप्पैया को

आश्रम

साबरमती

२६ जनवरी, १९२९

प्रिय मित्र, आपका पत्र मिल गया। थोड़ा आश्चर्य हुआ। मैं सोच रहा था कि आप मुझे अप्रैल शुरू होने से पहले तो नहीं ही बुलाना चाहेंगे। इसलिए मेरा सारा कार्यक्रम अप्रैल में आन्ध्र पहुँचने की दृष्टि से बन रहा है। ३० और ३१ मार्च को मुझे काठिया-वाड़ में रहना ही होगा। वर्तमान कार्यक्रम के अनुसार मुझे फरवरी के लगभग अन्त तक

१. देखिए “टिप्पणियाँ”, ३१-१-१९२९ का उप-शीर्षक “ग्राम सेवकों के लिए प्रशिक्षण वर्ग" ।

२. उस पत्र में प्रेषकने लिखा था : "जैसे भी हो, कृपया आन्ध्रका दौरा स्थगित मत कीजिए । आपका मार्चका महीना तो हमारा हो ही चुका है और हम अप्रैलका आधा महीना भी चाहते हैं..." (एस० एन० १५३०७ ) ।