भजनका गाना सार्थक माना जा सकता है। अगर यह बात याद न रखी जाये तो कवि के कथनानुसार समझ लेना चाहिए कि 'सब साधन बन्धन बने'।
[ गुजराती से ]
नवजीवन, २७-१-१९२९
४८७. खादी की बिक्री कैसे बढ़ेगी?
श्री विट्ठलदास जेरा जाणी खादी की बिक्री बढ़ाने के बारे में 'खादी पत्रिका' में एक महत्त्वपूर्ण बात लिखते हैं। उसकी कुछ बातें नीचे देता हूँ :
यह एक रास्ता तो है ही। इसी में से एक मार्ग सूझ पड़ता है और इच्छा होती है कि उसे पाठकों के सामने रखा जाये। हर एक गाँव के किसी भी चीज के व्यापारी, अगर वे अपनी छोटी-सी रकम भी खादी में लगाना चाहें तो दस रुपयों की या अधिक-की खादी खरीदें और सो भी इस शर्तपर कि यदि वे उसे एक महीने के भीतर न बेच सकें तो अपने खर्च से वापस खादी भण्डार को भेज दें। जो लोग व्यापारी नहीं हैं, अगर चाहें तो वे भी यह काम कर सकते हैं। इसमें दोनों में से किसी एक पक्ष को भी खतरे की आशंका नहीं रहती और खादीका प्रचार तो सहज ही हो सकता है। सारे संसार में अच्छी या बुरी कई चीजों का प्रचार इसी तरह हुआ है। देखते-देखते सारे भारत में चाय का जो प्रचार हुआ है वह इसी तरह उसे घर-घर पहुँचा कर ही किया गया है। लेकिन यह तो एक बुरे व्यसन का प्रचार हुआ। इसके कारण जनता को नुकसान ही नुकसान सहना पड़ा है। खादी-प्रचार में प्रचार करने वाले, खरीदने वाले और जिसके लिए प्रचार किया जाता है उसका — तीनों का लाभ है। इतना होने पर भी इस तरह का प्रचार-काम करने वाले पर्याप्त लोग नहीं मिलते। ऐसे समय अगर काफी आदमी दस-दस रुपए की पूंजी लगा कर उसके ब्याज का मोह छोड़ दें तो भी हमें कुछ सन्तोष हो सकता है। लेकिन मुझे यहाँ स्पष्ट ही मंजूर कर लेना चाहिए कि इस सूचना में एक रहस्य छुपा हुआ है। अगर कोई आदमी सौ रुपये दे और कहे कि इनसे दस गाँवों में दस-दस रुपयों की खादी का प्रचार किया जाये तो ये सौ रुपए महँगे पड़ेंगे और गरज भी नहीं सरेगी। मेरी सूचना का गर्भितार्थ तो यह है कि ऐसे कार्यकर्त्ता देहात के रहनेवाले हों। और वे दस-दस रुपये की पूंजी लगायें। यही शर्त है। क्योंकि ऐसे आदमी ही गाँवों में खादी का प्रचार करेंगे। सारांश, मेरी सूचना के मुताबिक सौ से अधिक के दानियों को ढूंढने की जरूरत नहीं है, जरूरत तो गाँवों के खादी-प्रेमियों को ढूंढ़ निकालने की है जो अपने पास या अपनी साखपर किसी मित्र से दस रुपए लेकर इस काम में लगायें और उतनी खादी का प्रचार करें। मैं चाहता हूँ कि श्री विट्ठलदास और सब खादी-प्रेमी इस तरह का प्रयत्न करें; ऐसे कार्यकर्त्ता खोजें।
[ गुजरातीसे ]
नवजीवन, २७-१-१९२९
१. यहाँ नहीं दी गई है। पत्र लेखक ने इसमें खादी-भण्डार बम्बई द्वारा दी जा रही सुविधाओं का विवरण दिया था।