पूरी तरह तैयार हो जाये, बलिदान देना स्वीकार कर ले तो उसी के मारफत स्वराज्य पलक मारते ही प्राप्त किया जा सकता है। देखना है गुजरात इसमें किस तरह हाथ बँटाता है।
[अंग्रेजी और गुजराती से]
यंग इंडिया, ३१-१-१९२९
नवजीवन, ३-२-१९२९
४९८. इस तरह नहीं
मैं एक प्रान्तीय कांग्रेस कमेटी के मन्त्री का बड़ा ही उपयोगी पत्र¹ नीचे दे रहा हूँ। इसमें पिछली बार के कांग्रेस अधिवेशन में हुई घटनाओं का विशद वर्णन मिलता है। इसमें जिस खींचतान का वर्णन है उसमें किसी एक ही प्रान्त ने नहीं, अनेक प्रान्तों ने भाग लिया था। निश्चय ही, अब प्रत्येक कार्यकर्त्ता के सामने यह बात हाथ-कंगन की भाँति प्रत्यक्ष हो जानी चाहिए कि यदि हम अपनी शक्ति के स्रोत को ही इस तरह विषाक्त बना देंगे तो स्वराज्य प्राप्त करने की सम्भावना अनिश्चित काल तक के लिए टल जायेगी। हमारी इस संस्था में काम करने वालों को धन पाने का लोभ तो हो नहीं सकता, क्योंकि वह यहाँ है ही नहीं और यश पानेbकी भी अधिक सम्भावना नहीं है। इसलिए यदि ऐसी संस्था में भी लोग चुनावों के लिए ऐसी खींचतान करने और जाली मतदाता सूचियाँ तैयार करने की दलदल में पड़ जायेंगे, तो फिर उस दिन हमारा क्या हाल होगा जब अगणित प्रलोभन उपस्थित कर देनेवाले राज्य का इतना विशालकाय तन्त्र हमारे हाथ में आ जायेगा। मैं जानता हूँ कि इस आपत्ति का लोग क्या उत्तर दे सकते हैं। पर यदि उस उत्तर से हमारे देशभक्तों की तसल्ली हो जाये, तो सचमुच मेरे हृदय को ठेस लगेगी।
[अंग्रेजी से] यंग इंडिया, ३१-१-१९२९
४९९. दक्षिण में हिन्दी
श्रीयुत जमनालाल जी हिन्दी-प्रचार के लिए दक्षिण भारत का दौरा कर रहे हैं। इस दौरे का परिणाम यह निकलना चाहिए कि हिन्दी सीखने के इच्छुक स्त्री-पुरुष दुगुनी संख्या में आगे आयें और हिन्दी-प्रचार कार्यालय चलाने के लिए दुगुने उत्साह से चन्दा जमा हो। मद्रास से प्राप्त विवरण से पता चलता है कि श्रीयुत जमनालाल जी की लगन और निष्ठा ठीक-ठीक फलवती हो रही है । दक्षिण भारत के नेता जब तक हिन्दी सीखने से इनकार करते रहेंगे, तब तक दक्षिण शेष भारत से अलग-थलग सा ही बना रहेगा। यह बात अब सभी को स्पष्टतया समझ लेनी चाहिए कि हिन्दी को प्रादेशिक
१. पंजाब प्रान्तीय कांग्रेस कमेटी के मन्त्री के इस पत्र में कलकत्ता कांग्रेस अधिवेशन के लिए प्रतिनिधियों के पंजीकरण में बरती गई अनियमितताओं का ब्योरेवार वर्णन था।
३८-२९