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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 38.pdf/४८७

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५०१. सन्देश : अहमदाबाद के 'मजूर सन्देश' ⁹ को

[३१ जनवरी, १९२९]²

मजदूरों को अपने अधिकार प्राप्त करने के लिए पूरी-पूरी कोशिश तो करनी चाहिए, लेकिन शिष्टता और शान्ति के साथ। यदि पंच लोग कोई फैसला न दें या मालिक पंचों से फैसला कराने न जायें या वे पंच-फैसले पर अमल न करें, तो मजदूरों- को हड़ताल करने का पूरा अधिकार है। परन्तु एक बार हड़ताल शुरू कर देने के बाद उनको किसी भी हालत में बेसब्री से काम नहीं लेना चाहिए। हड़ताल में शामिल न होने वाले अपने साथियों के साथ उनको जोर-जबर्दस्ती भी नहीं करनी चाहिए। गुजरात जिनिंग मिल में जो हड़ताल चल रही है, उसमें मजदूरों को श्रीमती अनसूया बहन, श्री शंकरलाल बैंकर और मजदूर संघ के मन्त्रियों की हिदायतों पर चलना चाहिए।

[अंग्रेजी से]

हिन्दू, १-२-१९२९


५०२. पत्र : हरिभाऊ उपाध्याय को

साबरमती

३१ जनवरी, १९२९

भाई हरिभाऊ,

तुम्हारा पत्र मिला। तुम प्रार्थना में नहीं आ सकते, इसकी कोई फिक्र मत करो। न आ पाने का तुम्हें दुख है, यह मुझे अच्छा लगा है। प्रार्थना का रहस्य हृदय में समझ लेनेपर वह खाने-पीने की क्रिया से भी ज्यादा अनिवार्य हो जाती है।

बापू के आशीर्वाद

गुजराती (सी० डब्ल्यू० ६०६४) से।

सौजन्य : हरिभाऊ उपाध्याय



१. एक मजदूर पत्रिका।

२. इस सन्देश को अहमदाबाद के फ्री प्रेस ऑफ इंडिया ने इसी तिथि को प्रकाशित किया था।