५०८. पत्र : छगनलाल जोशीको
२ फरवरी, १९२९
तुम्हारा भेजा हुआ तार सिद्धपुरमें मिल गया था । मारवाड़ जंक्शनपर भी तार मिला । आशा तो कम ही है । बा और कान्ति दिल्ली जानेके लिए उतर गये हैं । ऐसे प्रसंग हमें नम्र और अधिक कार्य-परायण बनाते हैं । सिद्धपुरमें स्वामी और येहाभाई मिले थे रमणीकलाल सिद्धपुर जायें और देखें कि वहाँ आसपास क्या ऐसी गरीब बहनें हैं जो कातने-पीजनेका काम करने को तैयार हैं। हों तो इनके बारेमें बतलायें । दान करनेके इच्छुक पूंजाभाईके कोई स्नेही हैं। उनकी इच्छा है कि सिद्धपुरमें ही खादी कार्य किया जाये ।
बापूके आशीर्वाद
बापुना पत्रो : श्री छगनलाल जोशीने
५०९. गुजरात कालेजके विद्यार्थी
गुजरात कालेज के छात्र-छात्राएँ दिनों-दिन अपने प्रभावमें जैसे-जैसे वृद्धि करते जाते हैं, वैसे-वैसे उनकी जिम्मेदारी भी बढ़ती जाती है । उनकी हड़ताल ज्यों-ज्यों लम्बी खिंचती जाती है तथा विद्यार्थियों की दृढ़ताके कारण पूरे देशके अधिक से अधिक लोगोंका ध्यान अपनी ओर खींचती जाती है त्यों-त्यों उनके सम्बन्धमें जनताकी आशा भी बढ़ती जाती है । बारडोलीके सम्बन्धमें जो हुआ वैसा ही यह भी है । ऐसा कहा जा सकता है कि शुरू में तो हड़तालसे विद्यार्थियोंका ही सम्बन्ध था किन्तु अब उसका सम्बन्ध पूरे हिन्दुस्तान से हो गया है । अतः अब उसमें शिथिलता आनी ही नहीं चाहिए। चारों ओरसे यह सुननेमें आ रहा है कि अधिकांश विद्यार्थी कहीं अपनी प्रतिज्ञाको तोड़ न दें। इस अफवाहके बावजूद 'चौकस आदमी सदा सुखी' के अनुसार विद्यार्थी सतर्क रहें तथा वे किसी प्रकारके लालच अथवा भयके सामने न झुकें, यह चेतावनी देने में मैं अविनय नहीं मानता ।
इस हड़तालका अच्छेसे अच्छा परिणाम तो तभी निकलेगा जब कि विद्यार्थी संगठित रूपसे कोई रचनात्मक काम करेंगे। ऐसे बहुतसे काम हैं । इसी अंक में
१. रसिकके बचनेकी ।