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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 38.pdf/४९८

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५१२. पत्र : कुसुम देसाईको कराची रविवार, ३ फरवरी, १९२९ चि० कुसुम, स्त्री-विभाग में सफाई अधिक रहनी चाहिए। सब बहनें मिलकर कामका बँटवारा कर लें । अन्दरके चौकमें बहुत पानी फैलता है, यह बन्द होना चाहिए । अब बाहर नहानेकी दो कोठरियाँ हो गई हैं तो सबका अधिकतर उन्हीं में जाना ठीक रहेगा । यशोदा बहन' जिस कोठरी में रहती है, वह भी साफ रहनी चाहिए। पानीका बन्दोबस्त कर लेना । आखिरी दिनोंकी कमजोरी मुझे खटकती है । उसे मैं समझ नहीं सकता । गुजराती (जी० एन० १७७५) की फोटो - नकलसे । ५१३. पत्र : छगनलाल जोशीको बापूके आशीर्वाद रविवार [३ फरवरी, १९२९] चि० छगनलाल तुम्हें एक पोस्टकार्ड मारवाड़ जंक्शनसे भेजा था वह मिला होगा । देवदाससे प्राप्त तारके अनुसार रसिकके बचनेकी आशा कम ही है। हम जिस ज्ञानको रोज तोते की तरह रटते रहते हैं, उसपर ऐसे समय ही अमल करना चाहिए । रमणीकलाल सिद्धपुर जाकर, आसपासके गाँवोंका निरीक्षण करे । वहाँकी बहनों की हालत जांचे। उसका कहना है कि यह दो या तीन दिनका काम है । सामान्यतया जो दर हम देते हैं वहीं इन बहनोंको दें। उन्हें पींजनेका काम सीखने को तैयार होना चाहिए। वहाँ छोटूभाई हैं जो इस कामको लेनेके लिए तैयार हैं। मुझे नहीं लगता कि इससे कुछ परिणाम निकलेगा । परन्तु हमारा पड़ताल कर लेना ही ठीक होगा । १. अम्बालाके एक खादी-कार्यकर्ता सूरजभानकी पत्नी । २. देखिए "पत्र : छगनलाल जोशीको ", २-२-१९२९ ।