भाषण : कराची नगरपालिकाके मानपत्रके उत्तरमें ४६५ चौकी और आफिसके पास किसीके सोनेका प्रबन्ध किया ही जाना चाहिए । इस बारे में देखना । रसोईका सारा काम सीधा-सरल हो जाना चाहिए। शाक-सब्जी पर ध्यान देना और घीके बारेमें भी देखना । [ गुजराती से ] बापुना पत्रो : श्री छगनलाल जोशीन बापूके आशीर्वाद ५१४. पत्र : प्रभावतीको रविवार [ ३ फरवरी, १९२९] चि० प्रभावती तुमारे खूब दृढ बनना है और वीरता प्राप्त करनी है । स्वाश्रयी बननेकी पूरी कोशीश करो । रसिकके बारेमें सब छगनभाईसे जानो । अब बीमार नहि होना है । जी० एन० ३३१८ की फोटो नकलसे । बापूके आशीर्वाद ५१५. भाषण : कराची नगरपालिका मानपत्रके उत्तर में ३ फरवरी, १९२९ गांधीजीने मानपत्रका उत्तर हिन्दीमें देते हुए नगरपालिकाको उसके स्नेह और हार्दिकता-भरे मानपत्रके लिए धन्यवाद दिया। उन्होंने उन पारसी महिलाओंको भी धन्यवाद दिया जिन्होंने खावीकी सुन्दर माला और गुलदस्ते भेंट के लिए तैयार किये थे। उन्होंने कहा कि में जहाँ-जहाँ भी गया हूँ वहाँके पारसी लोगोंसे मुझे सदा ही बड़ा स्नेह मिला है। इसलिए इन प्रेमपूर्ण भेंटोंको पाते हुए मुझे कोई आश्चर्य नहीं हुआ है । गांधीजीने नगरपालिकाके प्रशासकोंसे कहा कि अध्यक्षके पदपर श्री जमशेद मेहताका आसीन होना अपने-आपमें नगरपालिकाके काममें ठीक कार्य क्षमता और १. आशय गायके वीका प्रबन्ध करनेसे है। २. रसिककी बीमारीके उल्लेखसे । ३. मानपत्र कराची नगरपालिकाके अध्यक्ष, जमशेद मेहताने पढ़ा था। ३८-३०
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