सामग्री पर जाएँ

पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 38.pdf/५२

विकिस्रोत से
यह पृष्ठ जाँच लिया गया है।

 

१९. लालाजीपर आक्रमण

यह देश गरीब है, इसके भीतर उपद्रव, उसपर बाहरसे दबाव और लगत है उसके चारों ओर घोर अन्धकार छाया हुआ है। फिर भी वह भाग्यशाली जान पड़ता है। लालाजीपर लाहौर में पुलिस द्वारा किया गया आक्रमण उसके भाग्यशील होनेका शुभ लक्षण है। लालाजीने कोई गलती नहीं की थी और वे जिस जुलूसका नेतृत्व कर रहे थे उसने भी कोई गलत कदम नहीं उठाया था। जुलूस पर लालाजीका पूर्ण नियन्त्रण था। इसलिए इस सम्बन्धमें किये गये निश्चयके सिवा लालाजी या जुलूसका कोई और दोष तो नहीं बताया जा सकता। निश्चय किया गया था कि साइमन कमीशनके आनेपर उसके विरोध में शान्तिपूर्ण प्रदर्शन किया जाये। इस विरोधका प्रदर्शन करनेके लिए जुलूसको पुलिस द्वारा बनाये गये घेरे तक पहुँचना था। जुलूस इस घेरे तक पहुँच कर ऊँची आवाज में 'साइमन वापस जाओ' के नारे लगा रहा था। इस जुलूस में लाला लाजपतरायके अलावा लाला हंसराज, डाक्टर आलम और कई दूसरे नेता थे।

पुलिसको यह प्रदर्शन और प्रदर्शन करनेवालोंकी यह दृढ़ता बहुत अखरी, इसलिए उसने लालाजीको 'सबक सिखाने का निश्चय किया और उनपर आक्रमण कर दिया। आक्रमण खतरनाक नहीं हो पाया, इसका श्रेय पुलिसको नहीं दिया जा सकता। आँखके पास चोट लगी तो वह आँखपर भी लग सकती थी। छातीपर गम्भीर चोट आनेकी बजाय कुछ हलकी चोट आई, इसमें भी दोष दैवका था, पुलिसका नहीं। समाचारपत्रोंमें जो विवरण छपा है उससे मालूम होता है कि पुलिसने तो अपना हस्तलाघव दिखाने में कोई कमी नहीं रखी थी।

लालाजीने दृढ़तापूर्वक कहा है कि पुलिसने जो सफाई दी है वह बिलकुल झूठी है। पुलिसका कहना है कि उसने राहगीरोंके लिए थोड़ा रास्ता खुला छोड़ दिया था। जुलूसने उस रास्ते से घुसनेका प्रयत्न किया और पत्थर फेंके। लालाजीने इन दोनों आरोपोंसे इनकार किया है और कहा है कि यदि पुलिस इस बातपर मानहानिका मुकदमा चलाना चाहे तो अवश्य चलाये। वे अपने कथनकी सचाई सिद्ध करनेके लिए तैयार हैं।

अब देखना है कि पुलिस उनकी इस चुनौतीको स्वीकार करती है या नहीं?

जब लालाजी जैसे वीर नेता चोट खायेंगे तभी जनता और संसारका ध्यान आकर्षित होगा। एक मामूली मनुष्यकी मृत्युसे जितना ध्यान आकर्षित होता है, लालाजी पर किये गये इस आक्रमणसे उसकी अपेक्षा बहुत अधिक ध्यान आकर्षित हुआ है तथा अभी लोगोंका और भी अधिक ध्यान इस ओर आकर्षित होगा।

इतनी ही बात ध्यानमें रखनेकी है कि लोग शान्ति भंग करके कहीं जीती हुई बाजी हार न जायें। लोगोंके सर्वथा निरपराध होनेपर भी सरकार अन्याय