ही नहीं है । मैं मानता हूँ कि जब किसी उत्तराधिकारीकी आवश्यकता होगी तब वह बिना किसी प्रयत्नके मिल जायेगा। लेकिन उत्तराधिकारी तो एक गरीब भंगी अथवा कतैया भी हो सकता है। इसके लिए उसे नेता बनने की जरूरत नहीं । एक बार जब मुझसे अपने उत्तराधिकारीका नाम लेनेको कहा गया था, तब मैंने मौलाना मुहम्मद अलीकी बेटी गुलनारका नाम लिया था। लेकिन अब वह भी इस स्पृहणीय स्थानको ग्रहण करने के योग्य नहीं रह गई है। अब वह बच्ची नहीं है । उत्तराधि-कारीके सम्बन्ध में मेरे विचार आज भी उतने ही पुराने ढंगके हैं जितने कि आजसे सात साल पूर्व थे जब यह प्रश्न मुझसे पहले-पहल पूछा गया था ।
- [ अंग्रेजी से ]
- यंग इंडिया, ८-११-१९२८
३३. महात्मा होनेका नुकसान
किसी महात्माकी कठिनाइयाँ और मुसीबतें उन लोगोंकी कठिनाइयों और मुसीबतोंसे, जिनके नामके साथ श्रीमान या श्रीयुत जुड़ा रहता है अथवा जिन्हें सर- कारकी ओरसे 'नाइट' या 'बॅरोनेट' की उपाधि मिलती है, कम गम्भीर नहीं होतीं, बल्कि अक्सर तो बहुत ज्यादा गम्भीर होती हैं। अपने जीवनमें मुझे अनेक बार विरोध-भावसे आलोचना करनेवालोंके द्वारा खड़ी की गई ऐसी कठिनाइयों और मुसीबतोंसे जूझना पड़ा है; और ऐसी आलोचनाका कारण अक्सर यह रहा है कि अगर मुझसे सम्बन्धित कोई अफवाह कहीं अखबारोंमें छप जाती है तो मित्रगण खुद जाँच-पड़ताल करके सचाईका पता लगाने की तकलीफ उठाये बिना उस अफवाहको परम सत्य मान लेते हैं ।
अब अखबारों में सत्याग्रह आश्रमके विषय में जो कुछ छपा[१] है उसका कोई भी विश्वसनीय आधार नहीं है। जब आश्रम में एक महत्त्वपूर्ण परिवर्तन करनेका फैसला किया गया तो इस विषय में सदस्योंके बीच मतभेद था कि इस महान परिवर्तनको आजमा कर देखे बिना जनताको इसके अपनाये जानेकी सूचना दी जाये अथवा नहीं। मैंने अपने कतिपय विश्वस्त सहयोगियोंकी इस स्पष्ट इच्छाको स्वीकार कर लिया कि अभी परिवर्तनकी घोषणा न की जाये। मगर उनकी सलाह मानते समय भी मैं जानता था कि इसका परिणाम क्या होगा । मैं जानता था कि मुझसे सम्बन्धित कोई भी चीज पत्र संवाददाताओंकी नजरोंसे नहीं बच सकेगी। जो रिपोर्ट प्रकाशित हुई है, वह सर्वथा भ्रामक है ।
इससे सम्बन्धित सीधे-सादे तथ्य इस प्रकार हैं:
आश्रमके नियम-विधान में, सिवाय उसके नामके, और किसी बातमें कोई महत्त्व-पूर्ण परिवर्तन नहीं किया गया है। रिपोर्ट में ब्रह्मचर्यके नियम में परिवर्तन किये जानेकी बात भी छपी है । जहाँ कुछ हलकोंसे इस परिवर्तन के लिए मुझे अकारण ही बधाइयाँ १. देखिए "सत्याग्रहाश्रम", ४-११-१९२८ भी।
- ↑ १. देखिए "सत्याग्रहाश्रम", ४-११-१९२८ भी।