५३. पत्र : देवदास गांधीको
अमावस, मौनवार
[ १२ नवम्बर, १९२८][१]
आज अमावस है और मौनवार भी । इसलिए लिखनेकी खातिर ही लिख रहा हूँ । तुम्हारा भेजा हुआ हिसाब मैंने सँभाल कर रख दिया था, आज पाई-पाईका हिसाब देखा । एकाध जगह कहने लायक कुछ मिलता तो है; किन्तु कुल मिलाकर आपत्ति करने लायक कुछ नहीं है । अच्छे बनो और स्वस्थ रहो, मेरी ओरसे तुम्हें नये वर्षके लिए यही आशीर्वाद है । नवीन और रसिकके लिए भी यही चाहता हूँ । मेरा स्वास्थ्य अच्छा है ।
बापूके आशीर्वाद
जामिया मिलिया
- गुजराती (जी० एन० २१२६) की फोटो-नकलसे ।
५४. पत्र : नानाभाई मशरूवालाको
अमावस [ १२ नवम्बर, १९२८ ][२]
अहिंसा सम्बन्धी तुम्हारा निर्मल पत्र मैंने आजतक सँभाल कर रखा था । आज मौनवार अमावस्याके दिन उत्तर देनेके लिए हाथमें लिया तो लगा कि तुम्हारे साथ बहस में क्यों पइँ । जहाँ हृदयका सम्बन्ध हो वहाँ सब कुछ अपने आप समझमें आ जायेगा । यदि किसीसे भूल होगी तो वह स्पष्ट दिखाई दे जायेगी और हम सौजन्य-पूर्वक उसे स्वीकार कर लेंगे। यह समझकर मैं तुम्हारे साथ निरर्थक बहस नहीं करना चाहता । अकोलासे वर्धा आ सको तो आ जाना। यदि इच्छा होगी तो थोड़ी बातचीत कर सकते हैं ।
तुम सबको मेरा आशीर्वाद ।
बापू
- गुजराती (जी० एन० ६६७८) की फोटो-नकलसे ।