और चूँकि इन और अन्य कारणोंसे, पिछले तीन वर्षोंके अनुभवने संघ के विधान में ऐसा संशोधन करना वांछनीय सिद्ध कर दिया है जिससे कि संघका कोष और उसकी समस्त सम्पत्ति एक स्थायी न्यासी मण्डलको सौंप दी जाये, जो संघके प्रयोजनोंके लिए उस कोषके कर्ता-धर्ताका काम करे और साथ ही संघके संचालक मण्डलकी तरह भी काम करे;
इसलिए यह निश्चय किया जाता है कि :
१. अखिल भारतीय चरखा संघ और इसकी विभिन्न शाखाओंके पास इस समय जो कोष और सम्पत्ति है वह अबसे एक न्यासी-मण्डल के कब्जे में रहे, यह मण्डल संघका कार्यकारी मण्डल भी होगा ।
२. कथित न्यासी-मण्डल और कार्यकारी परिषद में निम्नलिखित बारह व्यक्ति होंगे, जो आजीवन इसके सदस्य रहेंगे, बशर्ते कि वे संघके सदस्य बने रहें और इनके अलावा तीन अन्य व्यक्ति भी मण्डलमें होंगे, जिन्हें चरखा संघ के सदस्य प्रतिवर्ष अपने 'क' वर्गके सदस्योंमें से चुना करेंगे, मगर जिनके चुनावमें किसी भी ऐसे व्यक्तिको वोट देनेका अधिकार नहीं होगा जो चुनावके समय दो वर्षोंसे लगातार संघका सदस्य न रहा हो ।
न्यासी-मण्डल और कार्यकारी परिषदके सदस्यके नाम हैं : ...................[१]
३. मण्डलके किसी सदस्य द्वारा त्यागपत्र दिये जानेपर अथवा किसीकी मृत्यु हो जानेपर जो स्थान रिक्त होगा उस स्थानपर मण्डलके शेष सदस्य संघके 'क' वर्गके सदस्योंमें से किसी की नियुक्ति करेंगे ।
ख. निश्चय किया जाता है कि यदि कोई सदस्य छः महीनेतक अपने हिस्सेका सूत नहीं भेजेगा तो वह संघका सदस्य नहीं रह जायेगा ।
ग. निश्चय किया जाता है कि उपर्युक्त बातोंको लागू करनेके लिए संघ के विधान में संशोधन किया जाये ।
घ. निश्चय किया जाता है कि प्रस्ताव १ की धारा २ के अन्तर्गत न्यासी-मण्डल और कार्यकारी परिषद के लिए तीन सदस्योंका चुनाव करनेके लिए संघके सदस्योंकी बैठक जल्द से जल्द बुलाई जाये ।
यह मसविदा परिषदके सदस्योंको भेजा जा रहा है और आगामी १८ दिसम्बरको वर्धा में जो विशेष बैठक हो रही है, उसमें इसे स्वीकृतिके लिए पेश किया जायेगा ।
इस प्रस्तावका अनुमोदन में हृदयसे करता हूँ। इन प्रस्तावोंमें एक विशेष बात यह है कि न्यासियोंकी नियुक्ति के लिए चुनावकी व्यवस्था शुरू की गई है। जब परिषदकी स्थापना हुई थी, उस समय हममें से किसीने भी इस सम्भावनापर
- ↑ १. साधन-सूत्र के अनुसार ।