लाभ जनताको अधिक मिला हो, ऐसा मुझको नहीं लगा । राणा साहबको थोड़ी
सत्ता और मिल गई। किन्तु कहना होगा कि मेर लोगोंको तो कुछ भी नहीं मिला ।
मेरी समझमें तो उनके मामलेकी पूरी जाँच भी नहीं की गई।
इसलिए मुझे यहाँ भी थोड़ी निराशा ही हुई । मैंने अनुभव किया कि न्याय नहीं मिला । न्याय प्राप्त करनेका मेरे पास कोई साधन नहीं था। अधिक से अधिक बड़े साहबके सामने अपील की जा सकती थी । वे यही कहते, "हम इस मामले में दखल नहीं दे सकते ।" ऐसे फैसलोंके पीछे कोई कानून कायदा हो, तो कुछ आशा भी की जा सके । पर यहाँ तो अधिकारीकी मर्जी ही कानून है । मैं बेचैन हो गया ।
इसी बीच भाईके पास पोरबन्दरकी एक मेमन पेढ़ीका सन्देशा आया, “दक्षिण आफ्रिका में हमारा व्यापार है । हमारी पेढ़ी बड़ी है । वहाँ हमारा एक बड़ा मुकदमा चल रहा है। चालीस हजार पौंडका दावा है। मामला बहुत लम्बे अरसेसे चल रहा है । हमारे पास अच्छे-से-अच्छे वकील बैरिस्टर हैं। अगर आप अपने भाईको वहाँ भेज सकें, तो वे हमारी कुछ मदद कर सकेंगे और उन्हें भी कुछ लाभ हो जायेगा । वे हमारे वकीलको अच्छी तरह मामला समझा सकेंगे। इसके सिवा एक नया देश देखेंगे और कई नये लोगोंसे जान-पहचान हो जायेगी । "
माईने मुझसे इसकी चर्चा की। मैं इसका पूरा-पूरा अभिप्राय नहीं समझ सका । समझ में नहीं आया कि मुझे सिर्फ वकीलको मामला समझानेका काम ही करना पड़ेगा या अदालतमें भी जाना होगा। फिर भी मुझे लोभ हुआ ।
दादा अब्दुल्लाके साझेदार मरहूम सेठ अब्दुल करीम झवेरीसे भाईने मुझे मिलाया । सेठने कहा, " आपको ज्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ेगी। बड़े-बड़े साहबोंसे हमारी दोस्ती है । उनसे आपकी जान-पहचान हो जायेगी। आप हमारी दुकानमें भी मदद कर सकेंगे। हमारे यहाँ अंग्रेजी पत्र-व्यवहार बहुत होता है । आप उसमें भी हाथ बँटा सकते हैं। आप हमारे बंगलेमें ही रहेंगे, इससे खर्चका कोई बोझ आपपर नहीं पड़ेगा । "
मैंने पूछा, आप मेरी सेवाएँ कितने समय के लिए चाहते हैं ? वेतन क्या देंगे ? "
" हमें एक सालसे अधिक आपकी जरूरत नहीं पड़ेगी। आपको पहले दरजेका मार्ग-व्यय देंगे और निवास तथा भोजन खर्चके अलावा १०५ पौंड देंगे । "
इसे वकालत नहीं कह सकते। यह नौकरी थी। पर मुझे तो किसी भी हालत में हिन्दुस्तान छोड़ना था । नया देश देखनेको मिलेगा और अनुभव प्राप्त होगा, सो अलग । भाईको १०५ पौंड भेज दूंगा, तो घर-खर्च चलाने में कुछ मदद होगी । यह सोचकर वेतनके बारेमें बिना कुछ कहे-सुने मैंने सेठ अब्दुल करीमका प्रस्ताव स्वीकार कर लिया और मैं दक्षिण आफ्रिका जानेके लिए तैयार हो गया ।