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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 39.pdf/१२४

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सम्पूर्ण गांधी वाङ्मय

बिठाना चाहते हो। मैं अन्दर जानेको तैयार हूँ, तुम्हारे पैरोंके पास बैठनेको तैयार नहीं हूँ ।"

मैं मुश्किलसे इतना कह ही पाया था कि मुझपर थप्पड़ोंकी वर्षा होने लगी और वह गोरा मेरे पाँव पकड़कर मुझे नीचे घसीटने लगा। बैठकके पास ही पीतलके सींखचे थे। मैंने उन्हें कसकर पकड़ लिया और तय किया कि कलाई भले टूट जाये, मैं सींखचे नहीं छोडूंगा । मुझपर जो बीत रही थी, उसे अन्दर बैठे हुए यात्री देख रहे थे । गोरा मुझे गालियाँ दे रहा था, खींच रहा था और मार भी रहा था और मैं चुप था। वह बलिष्ठ था, मैं कमजोर । यात्रियों में से कुछ लोगोंको दया आई और वे बोल उठे, "अरे भाई, उस बेचारेको वहाँ बैठा रहने दो। उसे नाहक मत मारो । उसकी बात सच है । वहाँ नहीं तो उसे हमारे पास अन्दर बैठने दो।" गोरेने कहा, 'हरगिज नहीं ।" लेकिन वह थोड़ा शर्मिंदा हुआ और उसने मुझे मारना बन्द कर दिया और मेरी बाँह छोड़ दी। दो-चार गालियाँ जरूर और सुनाई । लेकिन एक होटेंटटॉट' नौकर दूसरी तरफ बैठा था । उसे पैरोंके सामने बिठाकर वह खुद बाहर बैठ गया ।

यात्री अन्दर बैठ गये । सीटी बजी, सिकरम चल दी। मेरी छाती अभी तक धड़क रही थी । सोचता था, मैं जिन्दा मुकामपर पहुँचूँगा या नहीं। वह गोरा बराबर मेरी ओर घूरता ही रहा और बीच-बीच में अँगुली दिखा-दिखा कर बड़बड़ाता रहा : 'याद रख, स्टैंडर्टन पहुँचने दे, फिर मजा चखाऊँगा । " मैं तो गूंगा बना बैठा रहा और भगवानसे अपनी रक्षाकी प्रार्थना करता रहा ।

हम अँधेरा हो चुकनेपर स्टैंडर्टन पहुँचे । वहाँ कई हिन्दुस्तानी चेहरे दिखाई दिये । इससे मुझे कुछ तसल्ली हुई । नीचे उतरते ही हिन्दुस्तानी भाइयोंने कहा, "हम आपको ईसा सेठकी दूकानपर ले जानेके लिए आये हैं। हमें दादा अब्दुल्लाका तार मिल गया है।" मैं बहुत खुश हुआ । उनके साथ सेठ ईसा हाजी सुमारकी दूकानपर पहुँचा । सेठ और मुनीम गुमाश्तोंने मुझे चारों ओरसे घेर लिया। मैंने जो बीती थी सो उन्हें सुनाई । वे बहुत दुखी हुए और उन्होंने अपने-अपने कड़वे अनुभवोंका वर्णन करके मुझे शान्ति देनी चाही ।

मैं सिकरम कम्पनीके एजेंटको अपने साथके व्यवहारकी जानकारी देना चाहता था । मैंने एजेंटके नाम चिट्ठी लिखी । उस गोरेने मुझे जो धमकी दी थी उसका उल्लेख किया और यह आश्वासन चाहा कि आगेके लिए सुबह यात्रा शुरू करनेके समय मुझे दूसरे यात्रियोंके साथ अन्दरकी जगह दी जाये। चिट्ठी एजेंटको भिजवा दी। एजेंटने खबर भेजी : " स्टैंडर्टनसे बड़ी सिकरम जाती है और कोचवान वगैरा सब बदल जाते हैं । आपने जिस आदमी के खिलाफ शिकायत की है, वह कल वहाँ नहीं होगा। आपको जगह दूसरे यात्रियोंके पास ही दी जायेगी।" इस सन्देशसे मुझे थोड़ी निश्चितता हुई । मैंने उस मारनेवाले गोरेपर किसी तरहका मुकदमा चलानेका विचार तो किया ही नहीं था, इसलिए हमलेका यह अध्याय यहीं समाप्त हो गया ।

१. दक्षिण आफ्रिकाके केप नामक अंचलका मूल निवासी।