सामग्री पर जाएँ

पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 39.pdf/१३७

विकिस्रोत से
यह पृष्ठ जाँच लिया गया है।
१०५
सत्यके प्रयोग अथवा आत्मकथा

लेकिन मैंने उस दिनसे वह रास्ता छोड़ दिया। दूसरे सिपाहियोंको इस घटनाके बारेमें क्या मालूम? मैं जान-बूझकर फिर किस लिए लात खानेकी राह चलूं? मैंने घूमने जानेके लिए दूसरा रास्ता चुन लिया ।

इस घटना से प्रवासी भारतीयोंके प्रति मेरी भावना और भी तीव्र हो गई । इन कायदोंके बारेमें ब्रिटिश एजेंटसे चर्चा करके मैंने हिन्दुस्तानियोंसे कहा कि प्रसंग आनेपर इस बात को लेकर एक परीक्षात्मक मुकदमा दायर किया जाये ।

इस तरह मैंने भारतीयोंकी परेशानियोंके विषय में पढ़कर, सुनकर और अनुभव करके जानकारी प्राप्त की थी। मेरी समझ में आ गया कि स्वाभिमानकी रक्षाकी इच्छा करनेवाले हिन्दुस्तानियोंके लिए दक्षिण आफ्रिका अनुकूल देश नहीं है । मेरा मन अधिकाधिक इस विचार में व्यस्त रहने लगा कि यह स्थिति किस प्रकार बदली जा सकती है ।

किन्तु फिलहाल तो मेरा मुख्य काम दादा अब्दुल्ला के मुकदमेको ही सँभालनेका था ।

१४. मुकदमेकी तैयारी

मुझे प्रिटोरिया में जो एक वर्ष मिला, वह मेरे जीवनका अमूल्य वर्ष था । सार्व- जनिक काम करनेकी अपनी शक्तिका कुछ अनुमान मुझे यहीं हुआ और सीखनेका अवसर मिला । मेरी धार्मिक भावना अपने आप तीव्र होने लगी और कहना होगा कि सच्ची वकालत भी मैंने यहीं सीखी। नया बैरिस्टर पुराने बैरिस्टरके दफ्तर में रहकर जो बातें सीखता है, वे मैं यहीं सीख सका । यहीं मुझमें यह विश्वास मी पैदा हुआ कि मैं वकील की तरह बिलकुल अयोग्य सिद्ध नहीं होऊँगा । वकील बननेकी चाबी भी यहीं मेरे हाथ लगी ।

दादा अब्दुल्लाका मुकदमा छोटा-मोटा नहीं था । चालीस हजार पौंड अर्थात् ७ लाख रुपयोंका दावा था । दावा व्यापारके सिलसिले में था इसलिए उसमें हिसाबकी अनेक गुत्थियाँ थीं । दावेका आधार कुछ हद तक प्रोमिसरी नोटपर और कुछ हद तक प्रोमिसरी नोट लिख देनेके वचनका पालन करवानेपर था। बचावकी तरफसे यह कहा जा रहा था कि प्रोमिसरी नोट धोखा देकर लिखवाया गया है और उसके बदले में जो कुछ मिलना था, सो पूरा-पूरा मिला ही नहीं था । इसमें तथ्य और कानूनकी बहुत-सी गुंजाइशें थीं । बही-खातेकी उलझनें भी काफी थीं ।

दोनों पक्षोंकी ओरसे अच्छे-से-अच्छे सालिसिटर और बैरिस्टर किये गये थे । इसलिए मुझे दोनों ओरसे काम करनेवाले बैरिस्टरोंके तरीकेका अनुभव प्राप्त करनेका सुन्दर अवसर मिला । सालिसिटरके लिए वादीकी ओरसे मुकदमा तैयार करने और तथ्य संग्रह करनेका सारा काम मुझे सौंपा गया था । इकट्ठी की गई सामग्रीमें से सालिसिटर कितनी लेता है और उसके द्वारा तैयार की गई सामग्री में से कितनी सामग्रीका उपयोग बैरिस्टर करता है, सो मुझे देखनेको मिलता था । मैं समझ गया कि इस मुकदमेको तैयार करते हुए मुझे अपनी ग्रहण-शक्ति और व्यवस्था-शक्तिका ठीक अन्दाज लग जायेगा ।